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पुणे में मुला मुथा नदी बचाने के लिए 'ट्रैश बूम'

'माई रिवर, माई वैलेंटाइन' पहल के तहत चल रहा है ये प्रोजेक्ट

पुणे की पहचान व लाइफ लाइन मानी जाती है मुला मुथा नदी

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 2 January 2026 04:24:45 PM

'trash booms' installed to save the mula mutha river in pune.

पुणे। पुणे शहर की लाइफ लाइन मानी जाने वाली मुला मुथा नदी को प्लास्टिक और ठोस कचरे से बचाने केलिए वर्शिप अर्थ फाउंडेशन और शिपको ट्रांसपोर्ट ने 17 दिसंबर 2025 को एसएम जोशी ब्रिज के नीचे ‘ट्रैश बूम’ लगाने की एक अनुकरणीय पहल की है। ‘माई रिवर, माई वैलेंटाइन’ पहल केतहत चल रहे इस प्रोजेक्ट में नदी केबीच में एक मॉडर्न सिस्टम ट्रैश बूम लगाया गया है। इसकी मदद से नदी में बहने वाले प्लास्टिक, थर्मोकोल और दूसरे ठोस कचरे को रोका जा सकेगा और प्लान के हिसाब से इकट्ठा किया जाएगा। इससे नदी की सफ़ाई सिर्फ़ नदी के किनारों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नदी को अंदर से साफ़ और शुद्ध करने का प्रोसेस भी चलेगा।
मुला मुथा नदी को बचाने के लिए यह पहल सिर्फ़ एक दिन का सफ़ाई अभियान नहीं है, बल्कि नदी बचाने के लंबे समय के नज़रिए से उठाया गया एक ठोस और टिकाऊ कदम है। ट्रैश बूम सिस्टम एक मॉडर्न तरीका है, जो नदी में लगातार बहते कचरे को रोकने में मदद करता है। इस सिस्टम की खासियत यह हैकि यह नदी के नैचुरल बहाव को बिना छेड़े काम करता है। शुरुआत में नदी किनारे सफ़ाई कैंपेन चलाया गया। ट्रैश बूम सिस्टम के काम करने का पूरा तरीका लोगों को समझाया गया। मराठवाड़ा मित्रमंडल कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, दुर्गाबाई मुकुंददास लोहिया महिला महाविद्यालय, हुजूरपागा, मामासाहेब मोहोल महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नदी को बचाने का मैसेज देते नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए। वर्शिप अर्थ फ़ाउंडेशन के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर दिनेश कदम ने इस पहल के पीछे संगठन की भूमिका और ज़रूरत के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा हैकि मुला मुथा नदी पुणे की पहचान और यहां की लाइफ लाइन है।
सीईओ दिनेश कदम ने कहाकि अगर हम मुला मुथा नदी की हालत बदलना चाहते हैं, तो हमें सीधे इसे बचाने केलिए एक्शन में आना होगा, जिसके लिए ट्रैश बूम के ज़रिए नदी में कचरा रोकना नदी बचाने की दिशा में एक मॉडर्न, असरदार एक्सपेरिमेंट है। शिपको कंपनी के डायरेक्टर मिस्टर नितिन ठाकुर और ऑफिस बियरर शुभांगी सिन्हा ने युवाओं से नदी बचाने के काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। इस पहल में श्यामला देसाई, प्रशांत कनौजिया, पराग माटे फाउंडर वर्शिप अर्थ फाउंडेशन, एनवायरनमेंटलिस्ट, नागरिक, वॉलंटियर, स्टूडेंट्स और युवाओं की अच्छी-खासी हिस्सेदारी थी।

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