शिक्षा मंत्री का उद्योग-अकादमिक-सरकार के बीच सहयोग पर जोर
भारत मंडपम में आईआईटी मद्रास का प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 6 May 2026 02:55:28 PM
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी मद्रास के पहले ‘प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन’ का भारत मंडपम नई दिल्ली में उद्घाटन किया। ‘भारत केलिए आईआईटीएम केसाथ मिलकर निर्माण करना’ विषय केसाथ शिखर सम्मेलन का उद्देश्य उद्योग-अकादमी-सरकार केबीच सहयोगात्मक ढांचा तैयार करना है, ताकि ऐसी प्रौद्योगिकियों का डिजाइन, विकास और कार्यांवयन किया जा सके, जो विकसित भारत को आकार दें। धर्मेंद्र प्रधान ने कहाकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास अनुसंधान संचालित समाज से जुड़े नवाचार इकोसिस्टम का नेतृत्व करना जारी रखे हुए है, ये संस्थान शिक्षा जगत, उद्योग और सार्वजनिक उद्देश्य केबीच सहयोग को मजबूत कर रहा है, साथही डीप-टेक और अग्रणी अनुसंधान में भारत की क्षमताओं को भी बढ़ावा दे रहा है।
शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहाकि नरेंद्र मोदी सरकार में देश में अनुसंधान और नवाचार का एक सक्षम इकोसिस्टम बनाने की दृढ़ प्रतिबद्धता बनी हुई है। उन्होंने कहाकि अनुसंधान, विकास और नवाचार केलिए आवंटित 1 लाख करोड़ रुपये स्पष्ट रूपसे अनुसंधान क्षमता को व्यापक रूपसे बढ़ाने और ज्ञान को नवाचार व मापने योग्य परिणामों में बदलने के इरादे को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत अनुसंधान निवेश सरकार करती है, जो मजबूत सार्वजनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि नवाचार को गति देने और प्रभाव को व्यापक बनाने केलिए दीर्घकालिक सार्वजनिक क्षेत्र और उद्योग केबीच 50:50 की संतुलित साझेदारी की ओर बढ़ना चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान ने कहाकि प्रगति को केवल उद्धरणों, पेटेंटों और आईपीओ से आगे बढ़ने का समय आ गया है और एक परिपक्व नवाचार प्रणाली का वास्तविक मानदंड अनुसंधान को उपयोग योग्य उत्पादों, विस्तार योग्य प्रौद्योगिकियों और सार्थक सामाजिक समाधानों में परिवर्तित करने की उसकी क्षमता में निहित है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहाकि भारत निर्माण केवल एक उद्देश्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन है। उन्होंने कहाकि 2047 तक वैश्विक आबादी का एक बड़ा हिस्सा विशेष रूपसे वैश्विक दक्षिण भारतीय विकास मॉडल की ओर देखेगा, जिससे भारत के अनुसंधान और शिक्षा संस्थानों पर अधिक जिम्मेदारी आ जाएगी। उन्होंने कहाकि देश का नवाचार इकोसिस्टम न केवल मजबूत होना, बल्कि वैश्विक स्तरपर परस्पर सहयोगात्मक और संस्थागत रूपसे सुव्यवस्थित होना भी अनिवार्य है। उन्होंने कहाकि भारत इनोवेट्स जैसे कार्यक्रम उच्चशिक्षा संस्थानों और केंद्र के वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों को वैश्विक मंच पर लाकर व्यापक स्तरपर डीप-टेक नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्र निर्माण केलिए नवाचारों को प्रभावी समाधानों में बदलने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप आईआईटी मद्रास ने स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने और एक स्थायी भविष्य को बढ़ावा देने केलिए समर्पित अनुसंधान केंद्र स्थापित करने हेतु एनटीपीसी लिमिटेड, बीपीसीएल और एचएसबीसी केसाथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जिनका धर्मेंद्र प्रधान ने उद्घाटन किया।
शिक्षा राज्यमंत्री और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने भी आईआईटी मद्रास प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत में गहन प्रौद्योगिकी विकास केलिए अनुसंधान को गति देने, नवाचार वित्तपोषण को मजबूत करने और सुदृढ़ मार्ग प्रशस्त करने में आईआईटी इकोसिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहाकि यह शिखर सम्मेलन हृदय संबंधी अनुसंधान और रोबोटिक सर्जरी से लेकर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और बोधन एआई जैसी सॉवरेन एआई पहलों तकके प्रभावशाली विकासों से शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के शक्तिशाली संगम को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहाकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास इस बात का उदाहरण हैकि कैसे विश्वस्तरीय नवाचार भारतीय संस्थानों में स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहाकि ऐसे सहयोगात्मक मंच यह सुनिश्चित करते हैं कि अनुसंधान को उद्देश्य मिले और उद्योग उसे दिशा प्रदान करे, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ विजन को आगे बढ़ाया जा सके।
प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदर्शनी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास ने इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (आईओई) ढांचे केतहत स्थापित 15 उत्कृष्टता केंद्रों के शोध को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल लगाए गए। प्रदर्शनी में स्वास्थ्य सेवा, सततता सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने वाली अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय में विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता के सचिव संजय कुमार, उच्चशिक्षा के सचिव डॉ विनीत जोशी और एनटीपीसी, बीपीसीएल और एचएसबीसी की नेतृत्व टीमें भी उपस्थित थीं।