विमोचित पुस्तकों में तमिल धरोहर, सभ्यता और विविधताओं का दर्शन
उपराष्ट्रपति ने प्रकाशन विभाग की ओर से किया पुस्तकों का विमोचनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 3 March 2026 03:19:14 PM
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग की ओरसे प्रकाशित 16 महत्वपूर्ण पुस्तकों का उपराष्ट्रपति भवन में कार्यक्रमपूर्वक विमोचन किया। ये पुस्तकें तमिल के विख्यात विद्वानों, विरासत, वास्तुकला, साहित्य एवं संस्कृति को समर्पित हैं। विमोचित पुस्तकों में से 13 तमिल भाषा में हैं। तमिल शीर्षकों में रामेश्वरम्, रामानुजार, नादुकल, अरिकाइमेडु, बक्थी इलक्कियाम, इयारकई वेलनमई, पजंथामिजान इसई करुविगल, तमिझागा नत्तार देवंगल, पुधिया अरिवियाल थोझिलनुतपंगल, बंकिमचंद्र चटर्जी, मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर, तंजावुर पेरुवुदयार कोइल, मणिमेगलाई और महाविद्वान मीनाक्षी सुंदरम पिल्लई प्रमुख रूपसे शामिल हैं। उपराष्ट्रपति ने कहाकि विमोचित पुस्तकें मंदिर परंपराओं, दर्शन, साहित्य, संगीत और विज्ञान केसाथ तमिल धरोहर की गहराई, विविधता और सभ्यतागतओं की निरंतरता को दर्शाती हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने तमिल को विश्व की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए कहाकि भारत अनेक भाषाओं की भूमि है, लेकिन उनकी आत्मा एक है। उन्होंने वैश्विक मंच पर तमिल को हमेशा सम्मान देने केलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और युवाओं से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा मातृभाषा में पढ़ने का आग्रह करते हुए आर्थिक प्रगति केसाथ सांस्कृतिक शक्ति पर भी बल दिया। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और वैश्विक स्तरपर मान्यता प्राप्त समृद्ध और प्राचीन संस्कृति वाली शास्त्रीय भाषा के तौरपर तमिल की प्रशंसा की। उन्होंने कहाकि प्रकाशन विभाग की रोचक ज्ञानपूर्ण पुस्तकें इस गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाती हैं। कार्यक्रम में डॉ एल मुरुगन भी उपस्थित थे। उन्होंने तमिल संगम साहित्य के महत्व की बात की और 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को उजागर किया। कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण एसके बोस की बंकिमचंद्र चटर्जी की पुस्तक का अंग्रेजी, हिंदी और तमिल में विमोचन था।
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर प्रकाशित इस संस्करण में प्रख्यात साहित्यकार के जीवनकाल और भारतीय साहित्यिक आंदोलन में उनके योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है। अंग्रेजी संस्करण में एक नया आवरण, अतिरिक्त अभिलेखीय तस्वीरें और चित्र हैं। इसको विशेष रूपसे आईआईटी दिल्ली के सहयोग से स्टार्टअप की मदद से डिजाइन किया गया है, जिसमें समकालीन सौंदर्यशास्त्र और शास्त्रीय भावना का अद्भुत मिश्रण है। हिंदी और तमिल अनुवादों के एकसाथ विमोचन से वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी की विरासत पाठकों तक पहुंच गई है। रामेश्वरम् पर आधारित पुस्तक पुराणों और साहित्यिक स्रोतों से प्राप्त दस्तावेजी संदर्भों को प्रस्तुत करती है, इसमें रामेश्वरम् मंदिर परिसर के पवित्र स्थलों, स्थापत्य कला की भव्यता, मूर्तियों और देवी-देवताओं का विशेष वर्णन किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को मंदिर के इतिहास और आध्यात्मिक महत्व की व्यापक समझ प्रदान करना है।