जनजातीय होमस्टे संचालकों के लिए पेशेवर आतिथ्य कौशल शुरू
पर्यटन से आजीविका सृजन सरकार का एक व्यापक दृष्टिकोणस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 17 March 2026 04:10:21 PM
नई दिल्ली। भारतीय पर्यटन विकास निगम ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से होटल सम्राट नई दिल्ली में जनजातीय होमस्टे संचालकों केलिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देने और देशभर में जनजातीय होमस्टे संचालकों के पेशेवर आतिथ्य कौशल की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य जनजातीय कार्य मंत्रालय के आईटीडीसी के आईएचएम अशोक के संरचित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से सेवा मानकों को बढ़ाना, आगंतुकों के अनुभवों को बेहतर बनाना और जनजातीय समुदायों केलिए स्थायी आजीविका अवसरों का समर्थन करना है। कार्यक्रम के पहले बैच में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और गुजरात से 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा, अपर सचिव मनीष ठाकुर, आईटीडीसी की प्रबंध निदेशक मुग्धा सिन्हा, जनजातीय कार्य मंत्रालय की निदेशक डॉ वरनाली डेका, आईटीडीसी के वाणिज्य एवं विपणन निदेशक राजेश राणा उपस्थित थे।
होमस्टे क्षमता निर्माण कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आईएचएम अशोक के प्रकाशन ट्राइबल होमस्टे-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट मैनुअल 2026 का विमोचन था। यह मैनुअल भारतभर में जनजातीय होमस्टे के विकास और पेशेवर प्रबंधन का एक संरचित प्रारूप प्रदान करता है। इच्छुक होमस्टे संचालकों केलिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूपमें तैयार किया गया यह प्रकाशन बहुभाषी संसाधन के रूपमें विकसित किया गया है और समुदायों केबीच व्यापक पहुंच और प्रभावी प्रसार सुनिश्चित करने केलिए इसे हिंदी और गुजराती में अनुवादित किया गया है। जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव ने इस दौरान कहाकि भारतीय पर्यटकों की सोच बदल रही है, आज के यात्री भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के करीब और प्रदूषण मुक्त स्थलों की तलाश कर रहे हैं, वे इन वातावरणों का वास्तविक अनुभव करने केलिए अधिक समय तक ठहरना पसंद करते हैं। उन्होंने कहाकि ऐसे देश में जहां होटल के कमरों की भारी कमी है, होमस्टे मॉडल एक सशक्त समाधान प्रस्तुत करता है।
रंजना चोपड़ा ने कहाकि यह न केवल आधुनिक यात्रियों की अपेक्षाओं को पूरा करता है, बल्कि जनजातीय परिवारों विशेष रूपसे प्राकृतिक पगडंडियों से समृद्ध पर्वतीय और जनजातीय क्षेत्रोंमें रहने वालों केलिए सार्थक आजीविका अवसरों का भी सृजन करता है। उन्होंने कहाकि होमस्टे मालिकों को आतिथ्य सत्कार के बुनियादी सिद्धांतों से अवगत कराकर यह कार्यक्रम स्थानीय अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता रखती है। रंजना चोपड़ा ने कहाकि आईटीडीसी के उत्कृष्टता के साठ वर्ष पर जनजातीय कार्य मंत्रालय से यह साझेदारी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, इससे कई और समुदायों को पर्यटन आधारित आजीविका अवसर मिलेंगे। आईटीडीसी की प्रबंध निदेशक मुग्धा सिन्हा ने कहाकि भारत में होमस्टे अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशभर में एक लाख होमस्टे स्थापित करने के दृष्टिकोण से प्रेरित है। उन्होंने कहाकि 1500 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने का हमारा तात्कालिक प्रयास मात्र शुरुआत है, हमारा व्यापक लक्ष्य उन्हें अपने-अपने राज्यों में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षक बनने केलिए सशक्त बनाना है, जिससे यह मॉडल तेजीसे विस्तारित हो सके और यह सुनिश्चित हो सकेकि समुदाय अपने घर केपास ही प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
मुग्धा सिन्हा ने कहाकि जनजातीय कार्य मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय और अतुलनीय भारत मंच की शक्तियों और सामंजस्य को एकसाथ लाकर हम एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहे हैं, जो सतत पर्यटन को बढ़ावा देने केसाथ देशभर के समुदायों केलिए आजीविका के नए अवसर भी पैदा करता है। आईटीडीसी और जनजातीय कार्य मंत्रालय में यह सहयोग समावेशी विकास व पर्यटन से आजीविका सृजन पर सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि इसका उद्देश्य जनजातीय होमस्टे संचालकों को उच्च गुणवत्ता वाले आवश्यक कौशल और ज्ञान से लैस करके समुदाय आधारित पर्यटन को मजबूत करना है। उन्होंने कहाकि यह जनजातीय परंपराओं को संरक्षित करते हुए सार्थक आर्थिक अवसरों का सृजन करके सतत विकास में भी योगदान देता है। ज्ञातव्य हैकि आईटीडीसी की स्थापना 1966 में देश में पर्यटन अवसंरचना के विकास और विस्तार के उद्देश्य से की गई थी। यह अतिथियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने केलिए निरंतर प्रयासरत है। होटलों के संचालन के अलावा आईटीडीसी ने टिकट बुकिंग, टूर और ट्रैवल, इवेंट मैनेजमेंट, ड्यूटी-फ्री शॉपिंग, प्रचार और मुद्रण परामर्श, इंजीनियरिंग परामर्श, साउंड एंड लाइट शो का आयोजन, आतिथ्य शिक्षा और कौशल विकास जैसे गैर होटल क्षेत्रोंमें भी अपनी सेवाएं एकही बैनर तले प्रदान की हैं।