प्रथम विध्वंस के 1000 वर्ष बाद भी सोमनाथ अविनाशी-नरेंद्र मोदी
सोमनाथ अमृत महोत्सव के भक्तिमय वातावरण से शिवभक्त अभिभूतस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 11 May 2026 05:21:53 PM
प्रभास पाटन (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ मंदिर में महापूजा और कुंभाभिषेक किया। प्रधानमंत्री ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा की 75वीं वर्षगांठ पर वहां पहुंचकर अपने दिव्य अनुभव का वर्णन किया। उन्होंने कहाकि मंदिर के मार्ग पर भगवान सोमनाथ के भक्तों की अपार ऊर्जा और उत्साह देखकर वे अभिभूत और भावुक हो गए। उन्होंने कहाकि आज वे उस क्षण को फिरसे जी रहे हैं, जो भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन पर अनुभव किया होगा। उन्होंने कहाकि सोमनाथ अमृत महोत्सव का भक्तिमय वातावरण चारों ओर एक अद्भुत ऊर्जा का संचार कर रहा है, यह ऐतिहासिक दिन वास्तव में भारत की सभ्यतागत यात्रा में मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री ने कहाकि प्रथम विध्वंस के 1000 वर्ष बादभी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व है, 75 साल पहले आज केही दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना कोई साधारण अवसर नहीं था, अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था तो 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज़ादी के समय सरदार वल्लभभाई पटेल ने 500 से ज्यादा रियासतों को जोड़कर एक भारत का आधुनिक स्वरूप गढ़ा था तो सोमनाथ के पुनर्निर्माण से उन्होंने दुनिया को बताया थाकि भारत केवल आज़ाद नहीं हुआ है, भारत अपने प्राचीन गौरव को पुनः हासिल करने के मार्ग परभी अब आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहाकि विनाश में सृजन के संकल्प को सोमनाथ ने चरितार्थ किया है, असत्य पर सत्य की विजय को प्रभास पाटन ने बार-बार जिया है, हजारों वर्ष की आध्यात्मिक चेतना ने मानव मात्र के कल्याण की सीख समूचे विश्व को दी है। उन्होंने कहाकि सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं है, ये अगले एक हजार वर्ष केलिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। उन्होंने इस अवसर पर जिक्र कियाकि आजका दिन एक और वजह से भी विशेष है, 11 मई 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया था, देश के वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को दुनिया के सामने रखा था। उन्होंने कहाकि 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण हुए, जिससे दुनिया को पता चलाकि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है, उस समय दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन अटलजी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने ये दिखाया थाकि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है, दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण को ऑपरेशन शक्ति नाम दिया था, क्योंकि शिव केसाथ शक्ति की आराधना हमारी परंपरा है। उन्होंने बतायाकि जब देश का मिशन चंद्रयान सफल हुआ, तब चंद्रमा पर जहां भारत का रोवर लैंड हुआ, उस जगह का नाम भी हमने ‘शिवशक्ति पॉइंट’ रखा है, क्योंकि हमारी आस्था में चंद्रमा शिव से जुड़ा है और शिव शक्ति से जुड़े हैं और चंद्रमा के नामसे ही इस ज्योतिर्लिंग को हम सोमनाथ कहते हैं। उन्होंने कहाकि इतिहास के लंबे कालखंड में सोमनाथ मंदिर ने कितने ही आक्रमण झेले, महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी जैसे अनेक आक्रांता आए, लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया, वो सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे और ये बार-बार उठ खड़ा होता रहा, क्योंकि तोड़ने वालों को मालूम नहीं था, हमारे राष्ट्र का वैचारिक सामर्थ्य क्या है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि शिव तो सर्वात्मा हैं, इसलिए अलग-अलग काल में अलग-अलग जीवों की संकल्पशक्ति में शिव प्रकट होते रहे जैसे-राजा भोज, राजा भीमदेव प्रथम, राजा कुमारपाल, राजा महीपाल प्रथम, राव खंगार ऐसे अनेक शिवभक्त सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराते रहे, लकुलीश और सोम शर्मा ने प्रभास पाटन क्षेत्र की विरासत को संरक्षित किया, इसे शैव साधना और दर्शन का महान केंद्र बनाया। भाव बृहस्पति, पाशुपताचार्यों विद्वानों ने इसकी आध्यात्मिक परंपराओं को जीवित रखा, विशालदेव और त्रिपुरांतक ने यहांकी बौद्धिक चेतना को सुरक्षित रखने का पुनीत कार्य किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि वीर हमीर गोहिल, वीर वेगड़ा भील, अहिल्याबाई होल्कर, बड़ौदा के गायकवाड़, जाम साहब महाराजा दिग्विजय सिंह जैसी कितनी ही महान विभूतियों ने सोमनाथ की सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ राजेंद्र प्रसाद, केएम मुंशी एवं ज्ञात-अज्ञात दिव्यात्माओं को श्रद्धापूर्वक नमन किया और कहाकि वे हमें प्रेरणा देते हैंकि हमें न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है, बल्कि इस ज़िम्मेदारी को आनेवाली पीढ़ियों के हाथों में सौंपकर भी जाना है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि दुर्भाग्य से देश में ऐसी शक्तियां आजभी प्रभावी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान से ज्यादा तुष्टिकरण जरूरी लगता है, राममंदिर निर्माण जैसे अवसरों पर भी हमने देखा हैकि राम मंदिर निर्माण का विरोध किया गया। उन्होंने कहाकि हमें ऐसी मानसिकता से सावधान रहना है, इस तरह की संकुचित राजनीति को हमें पीछे छोड़ना होगा, हमें विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि बीते वर्षों में सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूपमें उन्हें सोमनाथ मंदिर और क्षेत्र के विकास सहित देश के कई और पवित्र तीर्थ जैसे-बाबा विश्वनाथ धाम, उज्जैन में महाकाल-महालोक, केदारनाथ धाम, अयोध्या में 500 साल की प्रतीक्षा भी पूरी हुई, ऐसे कितने ही पवित्र तीर्थ, मठ, मंदिर और क्षेत्र जिनकी महिमा हमने पुराणों में सुनी है, आज वहां हमें उस समृद्ध परंपरा के दर्शन होने लगे हैं और ये इतना कुछ 10-12 साल के भीतर हुआ है।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि हमारे सांस्कृतिक केंद्रों की उपेक्षा देश के विकास में बड़ी बाधा रही है, क्योंकि हमारे तीर्थ भारत की आध्यात्मिक एवं सामाजिक व्यवस्था के केंद्र तो हैं ही वो देश की आर्थिक प्रगति के भी स्रोत हैं, चारधाम महामार्ग परियोजना, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजना, करतारपुर कॉरिडोर, बौद्ध सर्किट के विकास से आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। सोमनाथ परिसर भी इसका एक सशक्त उदाहरण है, इससे प्रदेश और देश में प्रगति के नए द्वार खुलते हैं। उन्होंने कहाकि हमारी आस्था नदियों में भी है, वृक्षों में भी है, हम जंगलों को भी श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं, हम पर्वतों में भी पवित्रता का भाव रखते हैं और आज जब दुनिया प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौट रही है, हमें हमारी इस शक्ति को भी पहचानना होगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि हमें हमारे तीर्थों और मंदिरों के विकास केसाथ उनकी गरिमा केलिए जागरुक होना होगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि जब पीढ़ियां अपने इतिहास, अपनी आस्था और अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ती हैं, तब राष्ट्र का आत्मबल और भी मजबूत होता है। उन्होंने कहाकि आज भारत जिस आत्मविश्वास केसाथ आगे बढ़ रहा है, उसमें हमारी सांस्कृतिक निरंतरता की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहाकि सोमनाथ मंदिर हमें याद दिलाता हैकि कोईभी राष्ट्र तभी लंबे समय तक मजबूत रह सकता है, जब वो अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, सांसद, विधायक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस भव्य आयोजन में उपस्थित थे।