स्वतंत्र आवाज़
word map

एनडीआरएफ की 'आपदा सेवा सदैव सर्वत्र'

गृहमंत्री ने एनडीआरएफ जवानों को दिए 'प्रेसिडेंट्स कलर अवार्ड'

एनडीआरएफ दुनियाभर में आपदा राहत बचाव के भरोसे का प्रतीक!

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 14 May 2026 03:43:13 PM

home minister presents 'president's colour award' to ndrf

गाज़ियाबाद। गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के 8वीं वाहिनी परिसर गाजियाबाद में आज समारोहपूर्वक अदम्य साहस, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक एनडीआरएफ के वीर जवानों को 'प्रेसिडेंट्स कलर अवार्ड' प्रदान किए। गृहमंत्री ने कहाकि दुनियाभर में आपदा राहत और बचाव के भरोसे का प्रतीक बनकर उभरे एनडीआरएफ ने बीते दशक में ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के ध्येय वाक्य को चरितार्थ किया है। उन्होंने एनडीआरएफ बल के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और गाजियाबाद परिसर में रुद्राक्ष का पौधारोपण भी किया। अमित शाह ने कहाकि एनडीआरएफ को प्रेसिडेंट्स कलर प्रदान किया जाना सिर्फ उसकी सराहनीय सेवाओं को स्वीकार किया जाना ही नहीं, बल्कि यह एसडीआरएफ पंचायत से राज्य तक पूरी मशीनरी, एनसीसी, एनएसएस और हजारों की संख्या में आपदा मित्रों की सेवाओं का राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदन किया जाना है। उन्होंने कहाकि एनडीआरएफ के जवान देश में कहीं भी ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के घोष केसाथ जाते हैं।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि एनडीआरएफ ने अपनी स्थापना के 20 साल में देश में कहीं भी बाढ़, भूकंप, चक्रवात या किसी अन्य प्रकार की आपदा आई हो, अपने सफल कार्यों के आधार पर पूरे देश की 140 करोड़ जनता का विश्वास अर्जित किया है। उन्होंने कहाकि प्राकृतिक आपदा हो या कोई भीषण हादसा एनडीआरएफ की एक झलक ही देशवासियों के मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव भर देती है। इसने अबतक 1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई है और 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। गृहमंत्री ने कहाकि एनडीआरएफ को प्रेसिडेंट्स कलर मिलना बल के सेवा, साहस, शौर्य और समर्पण के संचित गुणों का सम्मान है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और एनडीआरएफ ने अपने कार्यकाल में आपदा बचाव के क्षेत्रमें भारत को वैश्विक नक्शे पर स्थापित करने का काम किया है, यह हम सभी केलिए गौरव की बात है, लेकिन देश के गृहमंत्री के नाते उनके लिए यह विशेष गौरव का विषय है। अमित शाह ने आज 116 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत वाली छह परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया और विश्वास व्यक्त कियाकि इन परियोजनाओं से एनडीआरएफ देश की जनता को किसीभी प्रकार की आपदा से सुरक्षित रखने केलिए औरभी मजबूती से काम कर पाएगी।
गृहमंत्री ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से अबतक हमने न केवल आपदा जोखिम न्यूनीकरण केलिए काम किया है, बल्कि अब हम ऐसी स्थिति में आ गए हैंकि अब हम जीरो कैजुअल्टी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं, जिस आपदा का पूर्वानुमान और मौसम विज्ञान विभाग से पूर्व जानकारी मिल जाती है, वहां जनधन की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य होता है। उन्होंने कहाकि एनडीएमए ने आपदा प्रबंधन से जुड़े नीति विषयक मामलों में ढेर सारे निर्णय लिए, बहुत सारे दिशानिर्देश जारी किए और जनजागरुकता की दिशा में सफल प्रयास किए, जिसकी वजह से धीरे-धीरे आपदा बचाव देश का संस्कार बनता जा रहा है। अमित शाह ने कहाकि एनडीआरएफ ने न केवल नागरिकों, बल्कि उनके साथ रहने वाले मूक पशुओं को भी बचाकर उत्कृष्ट सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहाकि हमारा लक्ष्य हैकि आपदा में जनहानि शून्य हो और संपत्तियों का नुकसान न्यूनतम हो। गृहमंत्री ने जिक्र कियाकि गृह मंत्रालय हीट वेव जैसी गंभीर चुनौतियों का भी बहुत ही प्रभावी तरीके से सामना करने की तैयारी कर चुका है।
अमित शाह ने कहाकि गृह मंत्रालय और एनडीआरएफ ने क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी पर बहुत बल दिया है, एनडीआरएफ ने अपने 8500 से अधिक जवानों, 10000 से ज्यादा सिविल डिफेंस कर्मियों और 2 लाख 20 हजार से अधिक वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने का भागीरथ कार्य किया है। उन्होंने कहाकि दो वर्ष में 10500 से अधिक नाविकों को भी प्रशिक्षित किया गया है। गृहमंत्री ने कहाकि कम्युनिटी बेस्ड आपदा रिस्पॉन्स को मजबूत करने केलिए आपदा मित्रों की टोली हर खतरे का मुकाबला करने में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहाकि पहले आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रिया राहत आधारित थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे सिर्फ रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया है। उन्होंने कहाकि इन 12 साल में आपदा से बचाव सिर्फ एक सिस्टम नहीं, बल्कि इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहाकि ग्राम पंचायत से भारत सरकार तक भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक से लेकर आम नागरिक तक हर जगह एकसाथ एक उद्देश्य केलिए काम करने का एक नया तरीका भारत सरकार ने अपनाया है।
अमित शाह ने कहाकि भारत में कई भीषण प्राकृतिक आपदाएं आईं-ओडिशा के सुपर साइक्लोन, गुजरात के भूकंप और हिंद महासागर की सुनामी ने देश के जनजीवन को झकझोर कर रख दिया, इनके कारण देश में एक मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता को महसूस किया गया और आपदा प्रबंधन अधिनियम भी आया। एनडीएमए और एनडीआरएफ का भी गठन हुआ। उन्होंने कहाकि अब 16 बटालियनों के साथ एनडीआरएफ एक सशक्त बल बन चुका है, इसने अपनी कार्यपद्धति से एसडीआरएफ की ट्रेनिंग और उसके साथ साझा अभियानों से अपनी शक्ति बढ़ाया है। उन्होंने कहाकि प्रोएक्टिव डिप्लॉयमेंट और प्रीपोजिशनिंग जैसे उपाय हमें नुकसान से बचाने में कारगर साबित हो चुके हैं। अमित शाह ने कहाकि 2008 में बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ एनडीआरएफ केलिए बहुत बड़ी परीक्षा थी, बादमें ऐसी कई आपदाएं आई जैसे-धराली में फ्लैश फ्लड, चासोटी में क्लाउडबर्स्ट, जम्मू, पंजाब और दिल्ली के फ्लड्स, साइक्लोन मोंथा और साइक्लोन दितवाह, वहीं अमरनाथ यात्रा, महाकुंभ, चारधाम यात्रा, मणि महेश, सबरीमाला यात्रा, भगवान जगन्नाथ रथयात्रा जैसे कई महत्वपूर्ण आयोजनों में एनडीआरएफ ने बहुत अच्छे तरीके से समाज केसाथ मिलकर काम किया।
गृहमंत्री ने कहाकि आपदा प्रबंधन के क्षेत्रमें 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है, इसके माध्यम से रिस्क मैपिंग, अर्ली वार्निंग, कम्युनिटी पार्टिसिपेशन और गाइडलाइंस के निर्माण जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिली है। अमित शाह ने कहाकि वैश्विक स्तरपर आपदा प्रबंधन के क्षेत्रमें भारत एक ग्लोबल लीडर और फर्स्ट रिस्पॉंडर के रूपमें उभरा है, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को व्यवहार में उतारते हुए इसे धरातल पर लागू किया गया है। अमित शाह ने कहाकि ‘डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के क्षेत्रमें भारत ने वैश्विक स्तरपर नेतृत्व किया है। सीडीआरआई के आज 48 देश सदस्य बन चुके हैं और भारत केसाथ मिलकर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर केंद्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो के निदेशक और एनडीआरएफ के महानिदेशक और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]