'परिवहन व्यापार पर्यटन और नदी प्रबंधन सरकार की एकीकृत रणनीति'
गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र बोर्ड के उच्चाधिकार समीक्षा बोर्ड की बैठक हुईस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 20 May 2026 03:39:40 PM
गुवाहाटी। केंद्र सरकार का ब्रह्मपुत्र को एक बहुआयामी आर्थिक गलियारा बनाने पर फोकस कर रही है, जिसमें केंद्रीय पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल परिवहन, व्यापार, पर्यटन और नदी प्रबंधन एक एकीकृत पहल का नेतृत्व कर रहे हैं। गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र बोर्ड के उच्चाधिकार समीक्षा बोर्ड की बैठक में इस पहल की समीक्षा की गई, जहां मंत्रियों, तकनीकी विशेषज्ञों और राज्य प्रतिनिधियों ने पूर्वोत्तर में वैज्ञानिक नदी बेसिन योजना, बाढ़ नियंत्रण और जल संसाधनों के सतत उपयोग को मजबूत करने पर विचार विमर्श किया। बैठक में बेसिन राज्यों केबीच बेहतर समन्वय और जीआईएस, लिडार और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर भी जोर दिया गया। सर्बानंद सोनोवाल ने इस अवसर पर कहाकि इस रणनीति का मूल आधार ब्रह्मपुत्र को केवल एक नदी के रूपमें नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में संपर्क और आर्थिक विकास को गति देने में सक्षम महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा के रूपमें मान्यता देना है।
जलमार्ग मंत्री ने कहाकि भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण ब्रह्मपुत्र की वास्तविक क्षमता को साकार करने का काम कर रहा है, जिसे राष्ट्रीय जलमार्ग 2 घोषित किया गया है। उन्होंने कहाकि यह असम और पूर्वोत्तर के हिस्सों को भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग से कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण अंतरदेशीय परिवहन गलियारा प्रदान करता है, जिससे पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ, किफायती और कुशल परिवहन व्यवस्था को पुनर्जीवित किया जा रहा है। उन्होंने बतायाकि असम में पांडू, धुबरी और जोगीघोपा में प्रमुख टर्मिनलों केसाथ-साथ फ्लोटिंग जेट्टी और उन्नत तटीय सुविधाओं सहित लगभग 751 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे 1100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से चल रहे कार्यों में जलमार्ग विकास, जहाज मरम्मत सुविधाएं, पर्यटक जेट्टी और डिब्रूगढ़ में एक क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है। सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि उन्होंने राज्यों में सतत जल गवर्नेंस को मजबूत करने केलिए केंद्र सरकार ने राज्य जल सुधार फ्रेमवर्क शुरू करने का स्वागत किया है। गौरतलब हैकि ब्रह्मपुत्र एशिया की सबसे प्रमुख और विशाल नदियों में से एक है, यह तिब्बत (चीन), भारत और बांग्लादेश से होकर लगभग 2900 किलोमीटर (कुल लंबाई करीब 3969 किलोमीटर) की दूरी तय करती है।
सर्बानंद सोनोवाल ने एकीकृत नदी विकास रणनीति की वकालत करते हुए कहाकि ब्रह्मपुत्र का विकास एक ऐसे लचीले और टिकाऊ नदी ईकोसिस्टम के निर्माण से संबंधित है, जो संपर्क, व्यापार और समुदायों का समर्थन करता है। सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि बाढ़ प्रबंधन, कटाव नियंत्रण, गाद निकालने और अवसंरचना विकास को मिलाकर एकीकृत नदी बेसिन योजना बनाना पूरे वर्ष नौगम्यता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने केलिए आवश्यक है। सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि GIS-आधारित योजना और डिजिटल निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर हम अपने जलमार्गों को कुशल, हरित और भविष्य केलिए तैयार परिवहन गलियारों में बदलने की दिशामें काम कर रहे हैं, साथही क्षेत्र के पारिस्थितिकीय संतुलन को भी संरक्षित कर रहे हैं, जैसाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिकल्पना की है। उन्होंने बतायाकि सरकार पूर्वोत्तर में सामुदायिक घाट, मालवाहक पोत, ड्रेजर और क्रूज टर्मिनल सहित लगभग 4800 करोड़ रुपये की भावी परियोजनाओं में भी निवेश कर रही है, इनसे अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने, रसद दक्षता में सुधार करने और नदी तटीय क्षेत्रों में रोजगार सृजित करने की उम्मीद है।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि मोदी सरकार ब्रह्मपुत्र नदी को एक्ट ईस्ट पॉलिसी केलिए एक रणनीतिक साधन के रूपमें देखती है, जो सीमापार संपर्क और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देती है। सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि अंतरदेशीय जलमार्गों को सड़क और रेल परिवहन के किफायती और पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूपमें तेजीसे स्थापित किया जा रहा है, जिससे भीड़भाड़, ईंधन की खपत और उत्सर्जन में कमी आती है। उन्होंने कहाकि आगे पूर्वोत्तर क्षेत्रमें अंतरदेशीय जलमार्ग क्षेत्रमें 79 सामुदायिक जेट्टी का विकास, डिब्रूगढ़ में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र और पांडू में जहाज मरम्मत सुविधा, रणनीतिक नदी बंदरगाहों पर सीमा शुल्क और आव्रजन केलिए सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण होने की संभावना है। योजना में ड्रेजर, सर्वेक्षण पोत और मालवाहक बेड़े की खरीद, असम में शहरी जल परिवहन प्रणालियों और क्रूज टर्मिनलों की शुरुआत भी शामिल है। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, जल शक्ति राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी, असम की पर्यटन मंत्री अजंता नियोग, अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बियुराम वाहगे, मणिपुर के पर्यटन मंत्री खुरैजाम लोकेन सिंह, मेघालय के जल संसाधन मंत्री मेटबाह लिंगदोह, मिजोरम के आईडब्ल्यूआरडी मंत्री पीसी वनलालरुअता, सिक्किम के सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल संचयन मंत्री सोनम लामा, त्रिपुरा के उद्योग मंत्री संताना चकमा, सलाहकार और ब्रह्मपुत्र बोर्ड के अध्यक्ष डॉ रणबीर सिंह भी उपस्थित थे।