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'विश्व के लिए भारत के एआई प्रेरित समाधान'

एआई स्टार्टअप संस्थापकों और शिक्षामंत्री की राउंडटेबल बैठक

भारतीय स्टार्टअप्स पीढ़ी ने एआई फर्स्ट समाधान प्रस्तुत किए

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 12 February 2026 05:10:15 PM

education minister's roundtable meeting with ai startup founders

नई दिल्ली। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी दिल्ली में शिक्षा में एआई का उपयोग करने वाले 10 नए युग के भारतीय स्टार्टअप्स संस्थापकों केसाथ राउंडटेबल बैठक की। बैठक में शिक्षा और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार और शिक्षा तथा कौशल विकास और उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित थे। बैठक में नीतिनिर्माता, शैक्षणिक नेता और उभरते तकनीकी उद्यमियों ने एआई का उपयोग कैसे भारत की शिक्षा प्रणाली को बदलने में किया जा सकता है और इसका राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप कैसे तालमेल बिठाया जा सकता है पर महत्वपूर्ण विचार विमर्श किया। यह राउंडटेबल बैठक शिक्षा मंत्रालय की एआई क्षमता को सशक्त बनाने वाली कई पहलों की श्रृंखला का हिस्सा थी। भारतीय स्टार्टअप्स की नई पीढ़ी ने अपने एआई-फर्स्ट समाधान प्रस्तुत किए, जो K-12 शिक्षा, परीक्षा तैयारी, कौशल उन्नयन, भाषा सीखने और कौशल शिक्षा में कार्यरत हैं, जिनका उद्देश्य पिछले इलाकों के छात्रों पर केंद्रित था। इसमें भाग लेने वाले स्टार्टअप्स थे-अरिविहान, फर्मी एआई, खरे एआई, सीखो, स्पीकएक्स, सुपरकलाम, सुपरनोवा, वेदांतु, कॉन्वेजीनियस और विरोहन।
भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन से पहले यह राउंडटेबल बैठक आयोजित की गई है। बैठक से प्राप्त जानकारियां इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन में नीति और इकोसिस्टम पर होने वाली चर्चा में उपयोग की जाएंगी, जिसके तहत शिक्षा क्षेत्रमें जिम्मेदार एआई अपनाने, सुरक्षा उपायों और विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाने के तरीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दो द्विवसीय भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन भारत मंडपम नई दिल्ली में किया गया है। सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के नीति निर्माता, शोधकर्ता, शैक्षणिक संस्थान और उद्योगजगत के प्रणेता भारत की शैक्षणिक इकोसिस्टम में एआई की रणनीतिक भूमिका पर चर्चा करेंगे, जिसमें नवाचार, विस्तृत रूपसे लागू करने और राष्ट्रीय क्षमता निर्माण पर विशेष जोर होगा। धर्मेंद्र प्रधान ने घरेलू स्टार्टअप्स संस्थापकों केसाथ गहन चर्चा में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की, जो विशेष रूपसे शैक्षिक परिदृश्य को बदलने और पुनर्परिभाषित करने केलिए ‘भारत से विश्व केलिए स्वदेशी एआई प्रेरित समाधान’ विकसित कर रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने खुशी व्यक्त कीकि इन सभी संस्थापकों की पृष्ठभूमि मध्यवर्गीय और टियर-III शहरों से है, उनका नवाचार और एआई को शिक्षा में समाहित करने की गहरी समझ तथा भारत केंद्रित शैक्षणिक चुनौतियों केलिए प्रभावशाली समाधान तैयार करना विश्वास और प्रेरणा देता है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहाकि प्रौद्योगिकी सशक्तिकरण और समावेशन का शक्तिशाली साधन है, जो आशा और अवसर केबीच की खाई को कम कर सकता है। उन्होंने विकसित भारत@2047 विजन में एआई की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। धर्मेंद्र प्रधान ने इन संस्थापकों को भारतीय मूल्यों, भाषाओं, संदर्भों और जरूरतों के अनुसार रचनात्मक समाधान विकसित करने केलिए प्रोत्साहित किया, साथही वैश्विक प्रासंगिकता भी सुनिश्चित की। उन्होंने आश्वासन दियाकि सरकार राष्ट्रीय शैक्षणिक और कौशल विकास प्राथमिकताओं को पूरा करने, भारत की तकनीकी, डिजिटल संप्रभुता को सशक्त बनाने और शिक्षा में प्रभावशाली डीपीआई बनाने में उन्हें पूरा समर्थन देगी। भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में लंबे समय से निवेशक रहे अशुतोष शर्मा ने यह दोहरायाकि शिक्षा तकनीक को एक राष्ट्रीय क्षमता के रूपमें देखना चाहिए, नकि सिर्फ अल्पकालिक व्यावसायिक अवसर के रूपमें। उन्होंने इसबात पर जोर दियाकि प्रौद्योगिकी ही भारत की शिक्षा में अंतर को पाटने का सबसे सही समाधान है और एआई एक ऐतिहासिक बदलाव का समय है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर छात्र तक पहुंचाने में सक्षम बनाता है, चाहे उसकी भौगोलिक या आय स्थिति कुछ भी हो।
राउंडटेबल बैठक में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ विनीत जोशी, आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामकोटी, प्रोसस इंडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के निवेशक और एम-एंड-ए प्रमुख आशुतोष शर्मा, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी), आईटी कौशल क्षेत्र परिषद, नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम), राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) के प्रमुखों, नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के कमिश्नर, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्‍यक्ष, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के आयुक्त, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के अध्यक्ष, शिक्षा मंत्रालय व कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख हितधारक शामिल थे।

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