भारतीय जनसंचार संस्थान का 57वां दीक्षांत समारोह
अश्विनी वैष्णव ने की जर्नलिस्ट फेलोशिप की घोषणास्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 28 February 2026 12:36:39 PM
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को बधाई देते हुए उल्लेख कियाकि आईआईएमसी की स्थापना लगभग छह दशक पहले हुई थी और तबसे इसने पत्रकारों व कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स की ऐसी पीढ़ियां तैयार की हैं, जिन्होंने विशिष्टता केसाथ भारतीय लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन में अपनी अनुकरणीय सेवाएं दी हैं। उन्होंने कहाकि जनवरी 2024 में आईआईएमसी को मानद विश्वविद्यालय (डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी) का दर्जा मिलने केबाद स्नातकों का यह पहला है। उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त कियाकि यह संस्थान देश के अग्रणी जनसंचार संस्थान के रूपमें अपनी विरासत को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा। उन्होंने मीडिया नवाचार और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने केलिए कैंपस इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की भी सराहना की।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मीडिया परिदृश्य में हो रहे बदलावों पर कहाकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, इमर्सिव स्टोरीटेलिंग और सोशल प्लेटफॉर्म्स ने कहानियों के सृजन और उन्हें देखने व पढ़ने के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने एवीजीसी क्षेत्र-एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और व्यापक क्रिएटर इकोनॉमी के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जिक्र कियाकि नरेंद्र मोदी सरकार ने विश्वस्तरीय प्रतिभा और नवाचार को पोषित करने केलिए नेशनल एवीजीसी-एक्सआर मिशन और सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहल शुरू की हैं। उन्होंने इच्छुक छात्रों को संसद टीवी केसाथ इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट के अवसरों को तलाशने केलिए भी आमंत्रित किया। लेखनी की शक्ति पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि प्रबुद्ध वर्ग विशुद्ध रूपसे सत्य पर आधारित सही और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाकर राष्ट्र का नेतृत्व करे। उन्होंने ग्रेजुएट विद्यार्थियों से कहाकि निर्भीक होकर सत्य लिखें और आप विकसित भारत का निर्माण करेंगे। गौरतलब हैकि आईआईएमसी अभी आठ पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम और कई एमए प्रोग्राम चलाता है, जिसमें 2026-27 तक तीन नए एमए कोर्स शुरू किए जाएंगे।
सीपी राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों से आग्रह कियाकि वे रेटिंग या शॉर्टकट के पीछे न भागें, बल्कि अपने लेखन की शुद्धता और ईमानदारी को आधार बनाएं। दिनमणि के पूर्व संपादक और एक दिग्गज पत्रकार एएन शिवरामन केप्रति अपने सम्मान को याद करते हुए उन्होंने कहाकि सामाजिक रूपसे जागरुक और सूचनात्मक पत्रकारिता नेतृत्व को आकार दे सकती है और नए लीडर्स बना सकती है। डिजिटल युग की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि जहां सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति के रास्तों का विस्तार किया है, वहीं इसने भ्रामक सूचनाओं और पोलराइजेशन को भी बढ़ावा दिया है, जो समाज केलिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने कहाकि शब्दों के परिणाम होते हैं, छवियां धारणाएं बनाती हैं और विमर्श विचारों को प्रभावित करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहाकि जमीनी स्तरपर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने केसाथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही भ्रामक खबरों और मनगढ़ंत विमर्श के खिलाफ भी उतनी ही महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ी जा रही थी। उन्होंने पत्रकारों से समाज में सकारात्मक बदलाव के दूत के रूपमें कार्य करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह कियाकि उनका लेखन राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों के दौरान सशस्त्र बलों के मनोबल का समर्थन करे।
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विस्तार लेते डिजिटल इकोसिस्टम और बढ़ते वैश्विक प्रभाव का अवलोकन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि दूरियां मिटाने और एक जागरुक नागरिकता को बढ़ावा देने में कम्युनिकेटर्स की निर्णायक भूमिका होगी। उन्होंने मीडिया संस्थानों से अपनी अपील दोहराते हुए कहाकि वे आर्थिक विकास, नवाचार और राष्ट्रीय प्रगति की सकारात्मक कहानियों को विशेष स्थान दें। उन्होंने कहाकि संतुलित पत्रकारिता को चुनौतियों केसाथ उपलब्धियों पर भी प्रकाश डालना चाहिए। विज्ञापन और जनसंपर्क के छात्रों से उन्होंने कहाकि रचनात्मकता का उपयोग ईमानदारी और उद्देश्य केसाथ परिवर्तन के माध्यम के रूपमें किया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहाकि जहां एक ओर तकनीक और प्लेटफॉर्म विकसित होते रहेंगे, वहीं पत्रकारिता के मूल मूल्य सटीकता, निष्पक्षता और जवाबदेही हमेशा बनी रहनी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने आईआईएमसी नई दिल्ली के नए शैक्षणिक ब्लॉक और छात्रावास की आधारशिला भी रखी। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि ये नई सुविधाएं डिजिटल लैब, एआई बेस्ड लर्निंग, डेटा पत्रकारिता और आधुनिक स्टूडियो को सुदृढ़ करेंगी, जिससे छात्र केवल तकनीक का अनुसरण करने के बजाय नवाचार का नेतृत्व करने में सक्षम बनेंगे।
दीक्षांत समारोह में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, रेल और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री तथा आईआईएमसी के कुलाधिपति अश्विनी वैष्णव, आईआईएमसी की कुलपति डॉ प्रज्ञा पालीवाल गौड़, आईआईएमसी सोसाइटी के अध्यक्ष राघवन जगन्नाथन, वरिष्ठ संकाय सदस्य, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी और ग्रेजुएट छात्रों के परिवारजन उपस्थित थे। अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर कहाकि आईआईएमसी भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है, जहां प्लेसमेंट दर बहुत अधिक है और यहां के स्नातकों की मीडिया उद्योग में व्यापक मांग है। उन्होंने घोषणा कीकि अगले शैक्षणिक सत्र से आईआईएमसी पत्रकारों केलिए फेलोशिप कार्यक्रम शुरू करेगा, ताकि प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और रणनीति जैसे क्षेत्रोंमें विशेषज्ञता हासिल की जा सके और अनुसंधान एवं क्षेत्र विशेषज्ञता को बढ़ाया जा सके। उन्होंने आईआईएमसी में इनक्यूबेटर की स्थापना की भी जानकारी दी। उन्होंने भारतीय लोक कथाओं को प्रौद्योगिकी संचालित कहानी कहने के प्रारूपों में बदलने वाले स्टार्टअप सहित अभिनव स्टार्टअप की सराहना की। उन्होंने भारत के भविष्य के प्रक्षेपवक्र को आकार देने में जन भारत के महत्व पर बल दिया।