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विधानमंडल लोकतंत्र की पाठशाला हैं-बिरला

'विधान गौरव यात्रा : भूतपूर्व एवं वर्तमान सदस्यों का सम्मेलन'

'सार्वजनिक जीवन में विश्वसनीयता और सतत संवाद जरूरी'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 15 July 2026 07:06:00 PM

75th foundation year of rajasthan legislative assembly

जयपुर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा हैकि विधानमंडल केवल कानून बनाने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे लोकतंत्र की ऐसी ‘पाठशालाएं’ हैं, जहां जनप्रतिनिधि संवाद, अनुशासन, सहमति और सेवा के मूल्यों का संस्कार प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहाकि जनप्रतिनिधियों को जनता केप्रति अपने दायित्वों का पूर्णतः बोध होना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र केवल संवैधानिक प्रावधानों से नहीं, बल्कि जनविश्वास, संवाद, गरिमा और सेवा भावना से सुदृढ़ होता है। ओम बिरला राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष पर आयोजित अमृत महोत्सव के अंतर्गत ‘विधान गौरव यात्रा : भूतपूर्व एवं वर्तमान सदस्यों का सम्मेलन’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राजस्थान विधानसभा को अपने सार्वजनिक जीवन की प्रथम पाठशाला बताते हुए ओम बिरला ने कहाकि इसी सदन में अर्जित लोकतांत्रिक मूल्य, संसदीय परंपराएं और विधायी आचरण ने उन्हें छात्र नेता से विधायक, सांसद और अंततः लोकसभा अध्यक्ष बनने की यात्रा में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहाकि विधानसभा में उन्होंने संसदीय लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप समझाकि सुनने की संस्कृति और स्वस्थ बहस लोकतंत्र को समृद्ध बनाती है तथा इतिहास का निर्माण करती है, जबकि व्यक्तिगत मतभेद लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहाकि सदन में होने वाली प्रत्येक बहस और प्रत्येक शब्द लोकतांत्रिक इतिहास का स्थायी हिस्सा बन जाता है। ओम बिरला ने कहाकि राज्य की लोकतांत्रिक चेतना केवल विधानसभा के इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन संवाद, विचार विमर्श और सहभागी शासन व्यवस्था की परंपराओं में गहराई से निहित है। उन्होंने कहाकि सभा और समिति की परंपरा, स्थानीय स्वशासन, जनभागीदारी राजस्थान के सामाजिक और राजनीतिक जीवन का अभिन्न अंग रही है, जिसे पंचायतों और प्रतिनिधिक संस्थाओं ने निरंतर सशक्त बनाया है।
ओम बिरला ने कहाकि राजस्थान विधानसभा ने सामाजिक न्याय, जनकल्याण और समावेशी विकास को बढ़ावा देनेवाले अनेक महत्वपूर्ण कानूनों, सार्थक चर्चाओं और दूरदर्शी नीतिगत निर्णयों से उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्तमान विधानसभा भवन को लोकतांत्रिक आत्मविश्वास और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया, जिनकी दूरदृष्टि और नेतृत्व में वर्तमान विधानसभा भवन का निर्माण संभव हुआ। ओम बिरला ने कहाकि आज विश्व भारत को केवल सबसे बड़े लोकतंत्र के रूपमें ही नहीं, बल्कि सबसे जीवंत लोकतंत्र के रूपमें भी मानता है। उन्होंने कहाकि संसद और राज्य विधानमंडल मिलकर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला हैं। उन्होंने कहाकि संसद की शक्ति सशक्त, सक्रिय और गरिमापूर्ण राज्य विधानमंडलों पर निर्भर करती है, ठीक उसी प्रकार जैसे राष्ट्र की शक्ति उसके राज्यों की सुदृढ़ता पर आधारित होती है। युवा जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन करते हुए ओम बिरला ने उन्हें निरंतर अध्ययन, ध्यानपूर्वक सुनने और सदन की कार्यवाही में सार्थक सहभागिता की आदत विकसित करने का आग्रह किया।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि जनता पद नहीं, बल्कि आचरण को याद रखती है, अध्ययनशील और विषय का गहन ज्ञान रखने वाला जनप्रतिनिधि ही जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं का प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व कर सकता है। उन्होंने सदस्यों को सलाह दीकि वे भाषणबाजी के स्थान पर तथ्य, तर्क और रचनात्मक बहस को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहाकि सार्वजनिक जीवन में विश्वसनीयता, ईमानदारी और समाज केसाथ सतत संवाद अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहाकि राजनीति का अंतिम उद्देश्य जनसेवा और राष्ट्र निर्माण होना चाहिए। ओम बिरला ने पीठासीन अधिकारी के पद की गरिमा व संसदीय परंपराओं के सम्मान के महत्व पर बल दिया। उन्होंने स्मरण कियाकि लोकसभा अध्यक्ष बनने के प्रारंभिक दिनों में एक वरिष्ठ सदस्य ने उन्हें पीठ की गरिमा बनाए रखने केलिए अनावश्यक रूपसे आसन से न उठने की सलाह दी थी। उन्होंने कहाकि सशक्त और सार्थक बहस लोकतंत्र की पहचान है, किंतु सदन की गरिमा और मर्यादा हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहाकि सदन में होने वाली प्रत्येक बहस, चर्चा और हस्तक्षेप इतिहास का हिस्सा बन जाती है तथा भावी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उन्होंने कहाकि जितना अधिक कोई जनप्रतिनिधि अध्ययन करेगा और दूसरों को सुनेगा, उसका संसदीय योगदान उतना ही अधिक प्रभावी और सार्थक होगा।
विधायी संस्थाओं के आधुनिकीकरण पर ओम बिरला ने सदन की बहसों और कार्यवाहियों के डिजिटल संरक्षण का आह्वान किया, ताकि भावी जनप्रतिनिधि अपने पूर्ववर्तियों के अनुभवों और विचार-विमर्श से सीख सकें। उन्होंने कहाकि विधायी अभिलेखों की सहज डिजिटल उपलब्धता संस्थागत स्मृति को सुदृढ़ करेगी, संसदीय शोध को समृद्ध बनाएगी, विधायी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाएगी। उन्होंने कहाकि लोकतांत्रिक परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए विधानमंडलों को समय की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रौद्योगिकी को अपनाना चाहिए। ओम बिरला ने कहाकि विधानमंडलों को संवाद, गरिमा, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व के आदर्श संस्थान बने रहना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि राजस्थान विधानसभा लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली में नई ऊंचाइयां प्राप्त करती रहेगी, देश की अन्य विधायी संस्थाओं केलिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी एवं प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, सांसद, पूर्व सांसद, राजस्थान सरकार के मंत्री, वर्तमान एवं पूर्व विधायक भी उपस्थित थे।

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