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'द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स'

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने की बीआर गवई की पुस्तक विमोचित

'पुस्तक संवैधानिक विमर्श व विधिक अध्ययन और सुदृढ़ करेगी'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 15 July 2026 01:43:54 PM

the voice of justice: justice gavai speaks

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ‘द वॉयस ऑफ जस्टिस : जस्टिस गवई स्पीक्स’ पुस्तक का विमोचन किया, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति बीआर गवई के भाषणों, व्याख्यानों और विचारों का संकलन प्रस्तुत किया गया है। उपराष्ट्रपति ने प्रोफेसर एस शिवकुमार की संपादित और कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के सहयोग से थॉमसन रॉयटर्स की प्रकाशित इस पुस्तक को एक संवैधानिक दस्तावेज़ बताया, जो अनुभव, संवैधानिक अनुशासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व से परिपक्व हुई न्यायिक सोच को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहाकि यह पुस्तक संवैधानिकता, विधि के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था पर महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है और आशा व्यक्त कीकि भारत में संवैधानिक विमर्श और विधिक अध्ययन को सुदृढ़ करेगी।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पुस्तक में संविधान पर व्यक्त विचारों का उल्लेख करते हुए कहाकि इसमें भारतीय संविधान को एक जीवंत और निरंतर विकसित होनेवाले दस्तावेज़ के रूपमें प्रस्तुत किया गया है, जिसने 75 वर्ष में निरंतरता और परिवर्तन, अधिकार और जवाबदेही तथा अधिकारों और कर्तव्यों केबीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने कहाकि जहां एक ओर संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बना हुआ है, वहीं उसमें संशोधन करने की संसद की शक्ति राष्ट्र को बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप और सक्षम बनाती है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि संवैधानिक शासन व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने व विधि के शासन में नागरिकों के विश्वास की रक्षा करने में न्यायपालिका की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहाकि संवैधानिक लोकतंत्र में अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही संयम भी है। उन्होंने कहाकि मजबूत संस्थाएं और न्याय व्यवस्था संस्थागत सत्यनिष्ठा, संवैधानिक अनुशासन, जनविश्वास व लोकतांत्रिक मूल्यों केप्रति प्रतिबद्धता के आधार पर ही सुदृढ़ बनी रहती हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि संवैधानिक शासन व्यवस्था नागरिकों की आकांक्षाओं और समाज की बदलती वास्तविकताओं केप्रति सदैव उत्तरदायी रहनी चाहिए। उन्होंने कहाकि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, अवसर और आशा सुनिश्चित करने केलिए वंचित समुदायों का सशक्तीकरण अत्यंत जरूरी है। न्यायपालिका में न्यायमूर्ति बीआर गवई के योगदान की सराहना करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि उनकी न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन व न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने केप्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है। उपराष्ट्रपति ने विधि जगत से जुड़े लोगों से समय-समय पर ग़रीब और वंचित लोगों का निःशुल्क प्रतिनिधित्व करने की अपील की, जिससे न्याय सभी केलिए सुलभ हो सके। इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई, थॉमसन रॉयटर्स के प्रकाशक गौरीशंकर नटेशन और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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