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'करदाता और सरकार के बीच विश्वास बढ़ा'

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से आयकर के प्रशिक्षुओं की प्रेरक मुलाकात

राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका केलिए बधाई व शुभकामनाएं!

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 10 March 2026 03:41:24 PM

income tax trainees' inspiring meeting with president draupadi murmu

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 79वें बैच के प्रशिक्षुओं ने आज राष्ट्रपति भवन में एक प्रेरक मुलाकात की। राष्ट्रपति ने प्रतिष्ठित सेवा में चयन होने पर सभीको बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रशिक्षुओं से कहाकि सिविल सेवा परीक्षा में सफलता उनके दृढ़ संकल्प, लगन और योग्यता का प्रमाण है, वे अब एक ऐसी अग्रणी सेवा में शामिल हो गए हैं, जो देश के विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा केलिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों को जुटाकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राष्ट्रपति ने कहाकि आयकर विभाग का आदर्श वाक्य 'कोष मूलो दण्डः' कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लिया गया है, जो याद दिलाता हैकि शासन की शक्ति राजकोष पर टिकी होती है। उन्होंने कहाकि हालके वर्षों में भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह में निरंतर वृद्धि अर्थव्यवस्था के बढ़ते औपचारिकरण, बेहतर प्रणालियों, करदाता और सरकार केबीच बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि प्रत्यक्ष कर राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और राजस्व का एक स्थिर स्रोत प्रदान करके सरकारों को बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश करने में सक्षम बनाता है। राष्ट्रपति ने कहाकि एक निष्पक्ष और पारदर्शी कर प्रणाली समानता को बढ़ावा देती है और समावेशी एवं सतत विकास की नींव को मजबूत करती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से विश्वास व्यक्त करते हुए कहाकि आयकर विभाग के अधिकारी के रूपमें वे यह सुनिश्चित करेंकि करों का संग्रह निष्पक्षता, दक्षता और पारदर्शिता केसाथ हो। राष्ट्रपति ने कहाकि राजस्व सेवा का दायित्व केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है, जटिल वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण करने, सीमापार अवैध वित्तीय प्रवाहों का पता लगाने और जटिल कॉर्पोरेट संरचनाओं को सुलझाने की क्षमता उनको विकसित भारत की ओर राष्ट्र की यात्रा को बढ़ावा देने में अपरिहार्य भागीदार बनाती है। उन्होंने कहाकि कर प्रशासक के रूपमें वे देश के कर ढांचे के प्रभावी कार्यांवयन को सुनिश्चित करके कानून के शासन को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि भारत विश्व की सबसे तेजीसे बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, औद्योगीकरण, औपचारिकीकरण, डिजिटलीकरण और शहरीकरण की प्रक्रियाएं देश की अर्थव्यवस्था को रूपांतरित कर रही हैं, जिससे कर प्रशासन में महत्वपूर्ण अवसर और नई चुनौतियां दोनों ही हैं। उन्होंने आयकर अधिकारियों से अपेक्षा कीकि वे न्यायसंगत, कुशल और व्यावसायिक प्रक्रियाओं की गहन समझ से निर्णय लें, जो व्यापार करने में सुगमता और देश के राजस्व की सुरक्षा केबीच सही संतुलन स्थापित करें। राष्ट्रपति ने कहाकि आईआरएस अधिकारी होने के नाते उनको अपने आचरण और निर्णय लेने में विवेक का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने उन्हें विनम्रता, संयम और संवैधानिक मूल्यों केप्रति अटूट प्रतिबद्धता केसाथ अपने अधिकार का प्रयोग करने की सलाह दी। भारतीय राजस्व सेवा के प्रशिक्षुओं में रॉयल भूटान सेवा के दो प्रशिक्षु अधिकारी भी शामिल हैं, जो नागपुर राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (एनएडीटी) में प्रवेश केबाद प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को यह जानकर खुशी हुईकि आयकर विभाग की प्रक्रियाओं में सुधार जारी है, सरलीकृत आयकर ढांचा, डेटा आधारित अनुपालन प्रणाली, पहले से भरे जानेवाले रिटर्न और वार्षिक सूचना विवरण में सुधार और प्रत्यक्ष प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने जैसी पहलों से पारदर्शिता, कार्यकुशलता और करदाताओं की सुविधा में सुधार हो रहा है। उन्होंने जिक्र कियाकि कर प्रशासन में प्रगतिशील बदलाव केलिए विभाग की ‘नॉन-इंट्रूसिव यूसेज ऑफ डेटा टू गाइड एंड इनेबल’ पहल का प्रतिनिधित्व किया जा रहा है। इसने तत्काल दंडात्मक कार्रवाई के बजाय डेटा आधारित जानकारियों का उपयोग करके रिपोर्टिंग में उल्लेखनीय सुधार किया है और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा दिया है। राष्ट्रपति ने कहाकि यह नए आयकर अधिनियम-2025 का अध्ययन करने वाला और इसे व्यवहार में लागू करने वाला पहला बैच होगा, जो कर चोरी और आर्थिक अपराधों के खिलाफ विश्वसनीय निवारण और स्वैच्छिक अनुपालन सुनिश्चित करने की दोहरी भूमिका निभाएगा।

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