'भारत-कोरिया रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव'
रक्षामंत्री ने किया भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 21 May 2026 03:00:17 PM
सियोल/ नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने सियोल के इमजिनगैक पार्क में संयुक्त रूपसे भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया। कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ पर निर्मित यह स्मारक युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया के साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। दोनों मंत्रियों ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन बहादुर शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी सेवा को कोरिया के लोग आजभी गहरे सम्मान और कृतज्ञता से याद करते हैं। रक्षामंत्री ने इस अवसर पर कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और मानवीय सहायता के क्षेत्रमें भारत के अमिट योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहाकि दोनों देशों का साझा इतिहास और बलिदान भारत-कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव बने हुए हैं।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद करने से लोगों केबीच आपसी समझ मजबूत होती है और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों पर नए सिरे से ध्यान जाता है। स्मारक की स्थापना में बहुमूल्य सहयोग केलिए उन्होंने कोरिया गणराज्य की सरकार विशेष रूपसे पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय केप्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री ने कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने भारतीय सैनिकों के बलिदान और मानवीय सेवा से निर्मित अटूट मित्रता के बंधन को स्वीकार किया। कोरियाई युद्ध में भाग लेनेवाले सैनिकों को सम्मानित करने और उनके बीच आदान-प्रदान को मजबूत करने के उद्देश्य से दोनों मंत्रियों ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सैनिकों के नि:स्वार्थ बलिदान की स्मृति में एक संस्मरण भी जारी किया गया।
कोरियाई युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज (महावीर चक्र विजेता) के नेतृत्व में 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने भीषण गोलीबारी केबीच हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा और उपचार करके व्यापक प्रशंसा अर्जित की थी। उनके अद्वितीय साहस और मानवीय दृष्टिकोण केलिए उन्हें घायल सैनिकों और नागरिकों ने 'मरून एंजल्स' की उपाधि से नवाजा था। युद्धविराम केबाद भी भारत ने सीएफआई से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग केतहत जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। वर्ष 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर केबाद युद्धबंदियों के मानवीय प्रत्यावर्तन और हिरासत को सुविधाजनक बनाने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल केएस थिमैया के नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता में एनएनआरसी की स्थापना की गई थी। सीएफआई ने इस संवेदनशील और जटिल जिम्मेदारी को पेशेवरता, निष्पक्षता और करुणा केसाथ निभाया, जिसके लिए उसे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति, सुलह और मानवीय सिद्धांतों में योगदान केलिए अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिली।
लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का नेतृत्व और कूटनीतिक कुशलता कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की रचनात्मक और शांतिप्रिय भूमिका का एक स्थायी प्रतीक बनी हुई है। भारतीय युद्ध स्मारक का निर्माण उसी क्षेत्र में किया गया है, जहां सितंबर 1954 में सीएफआई ने 'हिंद नगर' की स्थापना की थी, जिसमें लगभग 22000 युद्धबंदियों को उनके शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन तक रखा गया था। यह परियोजना भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से शुरू की गई है, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और अटूट मित्रता केप्रति भारत के गहरे सम्मान को दर्शाती है। समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, राजनयिक समुदाय के सदस्य और विशिष्ट अतिथि, लेफ्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज की भतीजी कल्पना प्रसाद भी मौजूद थीं। कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय ने इस महीने को कर्नल रंगराज के सम्मान में समर्पित किया है। समारोह भारत-दक्षिण कोरिया के साझा इतिहास के एक महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत कम ज्ञात अध्याय को पुनर्जीवित करने और सम्मानित करने का महत्वपूर्ण प्रयास था। कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों का योगदान शांति, मानवीय सहायता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग केप्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रतीक बना हुआ है।