देश और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए कार्य करें-लोकसभा अध्यक्ष
दिल्ली विधानसभा कार्यवाही खंड व विधान चेतना पत्रिका विमोचितस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 28 May 2026 06:31:09 PM
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा हैकि भविष्य में हम ऐसी पीढ़ी तैयार करें, जो देश और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए कार्य करे। उन्होंने कहाकि भारत का लोकतंत्र संपूर्ण विश्व केलिए एक मार्गदर्शक का कार्य करता है, यह अपने संवाद, सहभागिता और संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध परंपराओं के जरिए वैश्विक स्तरपर राष्ट्रों को प्रेरित कर रहा है। लोकसभा अध्यक्ष आज दिल्ली विधानसभा के ऐतिहासिक कक्ष में केंद्रीय विधानसभा (1924-1930) की कार्यवाही के 89 खंडों के विमोचन और त्रैमासिक पत्रिका 'विधान चेतना' के प्रथम अंक के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। ओम बिरला ने कहाकि संसदीय विरासत का संरक्षण लोकतांत्रिक चेतना को सशक्त करने की कुंजी है, लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक शक्ति जागरुक संवाद, तथ्य परक चर्चा और सक्रिय जनभागीदारी में निहित है। उन्होंने कहाकि भावी पीढ़ियों में लोकतांत्रिक चेतना को सुदृढ़ करने केलिए भारत की संसदीय विरासत का संरक्षण और गहन अध्ययन अत्यंत आवश्यक है, संसदीय विरासत लोकतांत्रिक चेतना को सशक्त बनाने की कुंजी है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि दिल्ली विधानसभा का यह ऐतिहासिक भवन भारत की लोकतांत्रिक चेतना, संसदीय परंपराओं और स्वतंत्रता संग्राम का एक जीवंत प्रतीक व गौरवशाली विरासत है। इसके ऐतिहासिक महत्व को स्मरण करते हुए ओम बिरला ने कहाकि इस भवन ने भारत के संसदीय लोकतंत्र के प्रारंभिक कालखंड को देखा है, यह एक ऐसा ऐतिहासिक मंच रहा है, जहां देश के स्वतंत्रता सेनानियों और महान राष्ट्रीय नेताओं ने प्रतिनिधित्व, नागरिक अधिकारों और स्वशासन केलिए अपनी मुखर संवैधानिक मांगें उठाई थीं। केंद्रीय विधानसभा के प्रथम भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल के अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए ओम बिरला ने कहाकि उन्होंने संसदीय शिष्टाचार, निष्पक्षता और अध्यक्ष पद (आसंदी) की गरिमा की एक सुदृढ़ नींव रखी थी। औपनिवेशिक शासन के अत्यंत कठिन समय और भारी दबाव के बावजूद उन्होंने इस विधायी संस्था की स्वायत्तता और प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण रखा, उनका यह योगदान देशभर के पीठासीन अधिकारियों और विधि निर्माताओं को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि केवल तर्क, गंभीरता और तथ्यों पर आधारित चर्चा ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को सुरक्षित रख सकती है और सार्वजनिक विश्वास को सुदृढ़ कर सकती है। उन्होंने कहाकि भारत की लोकतांत्रिक संस्कृति का मूल आधार सदैव चर्चा, आम सहमति और गहन विचार विमर्श रहा है, अतः संसद और राज्यों की विधानसभाओं को सदैव देश की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वोच्च मंच बने रहना चाहिए। ओम बिरला ने कहाकि डिजिटलीकरण, ई-विधानसभा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती हुई तकनीकें नीति-निर्माण और विधायी शोध को अधिक पारदर्शी, कुशल और सर्व-सुलभ बना रही हैं। ओम बिरला ने केंद्रीय विधानसभा की कार्यवाही के प्रकाशन को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए आशा व्यक्त कीकि यह संकलन आनेवाली पीढ़ियों केलिए लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय मर्यादाओं के मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ के रूपमें कार्य करेगा। उन्होंने कहाकि दिल्ली विधानसभा ने इन दुर्लभ बहसों और ऐतिहासिक कार्यवाहियों का व्यवस्थित प्रकाशन करके भारत के विधायी इतिहास को सहेजने में एक शून्यता को भरा है।
ओम बिरला ने कहाकि विधानसभा और लोकसभा सदनों की गरिमा, उनके नियम, परंपराएं तथा अध्यक्ष के समय-समय पर दिए गए निर्देश लोकतांत्रिक संस्थाओं केलिए प्रेरणादायी हैं। उन्होंने विधान चेतना पत्रिका को एक अत्यंत महत्वपूर्ण बौद्धिक प्रयास बताया, जो संसदीय अध्ययनों, विधायी शोध और लोकतांत्रिक जागरुकता को और अधिक सशक्त करेगा। उन्होंने कहाकि ऐसे प्रयासों से न केवल जनप्रतिनिधियों की बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि यह लोकतांत्रिक विमर्श और नागरिक चेतना को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुविधा केलिए ऐतिहासिक कार्यवाही तथा विधान चेतना पत्रिका, दोनों को डिजिटल प्रारूप में भी व्यापक रूपसे उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने भारत की समृद्ध संसदीय विरासत को संरक्षित करने और लोकतांत्रिक चेतना में नई ऊर्जा का संचार करने वाली ऐतिहासिक पहल केलिए दिल्ली विधानसभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री परवेश साहिब सिंह और दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट भी उपस्थित थे।