पहली स्काईकास्ट प्रणाली का उद्घाटन किया गया
सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग की उन्नत प्रौद्योगिकीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 30 May 2026 11:48:58 AM
नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा हैकि वैज्ञानिक नवाचार और उन्नत मौसम प्रौद्योगिकियों से देश कोहरा मुक्त उड़ानों के युग की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमानन को ‘हवाई चप्पल से हवाई जहाज’ तक ले जाने के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहाकि भारत अब विमानन और नागरिकों के लाभ केलिए मौसम सेवाओं के लोकतंत्रीकरण की ओर बढ़ रहा है। डॉ जितेंद्र सिंह ने इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे नई दिल्ली पर भारत की पहली ‘स्काईकास्ट प्रणाली’ का उद्घाटन करते हुए इसे भारतीय विमानन में एक नए युग की शुरुआत बताया। डॉ जितेंद्र सिंह ने बतायाकि विश्वभर में अबतक केवल 18 ऐसी उन्नत प्रणालियां मौजूद हैं और अब भारत विमानन मौसम निगरानी की एकीकृत वायुमंडलीय रिमोट सेंसिंग प्रणाली वाला विश्व का 19वां देश बन गया है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री ने कहाकि ऐसी सुविधा जेवर हवाईअड्डे पर भी स्थापित की जाएगी, जिसके बाद भारतभर के हवाई अड्डों पर इसका विस्तार किया जाएगा। डॉ जितेंद्र सिंह ने ग्लाइड पाथ 10 पर स्काईकास्ट सिस्टम और फॉग ऑब्जर्वेटरी सुविधा की शुरूआत की, जिसके बाद आईआईटीएम के वैज्ञानिकों ने एक तकनीकी ब्रीफिंग और प्रदर्शन प्रस्तुत किया। डॉ जितेंद्र सिंह ने भविष्य की ऐसी उन्नत मौसम संबंधी अवसंरचना को संभव बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिशन मौसम की दूरदृष्टि को दिया। उन्होंने कहाकि स्काईकास्ट गंभीर मौसम स्थितियों के दौरान पायलटों और विमानन संचालकों को वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करके विमानन सुरक्षा में एक बड़ा बदलाव लाएगा। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि यात्री ऐसे भविष्य की उम्मीद कर सकते हैं, जहां कोहरे और ट्रबुलेंस के कारण होने वाली उड़ान संबंधी बाधाएं काफी हदतक कम हो जाएंगी। उन्होंने कहाकि यह प्रणाली विमान चालक दल और पायलटों को लगभग तीन घंटे की छोटी समयावधि के भीतर भी अग्रिम चेतावनी प्रदान करेगी, जिससे वे सुरक्षित लैंडिंग का समय तयकर सकेंगे और अनावश्यक मार्ग परिवर्तन, रद्द होने और देरी से बच सकेंगे।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि स्काईकास्ट भारत के विमानन इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि यह कोहरे की निगरानी, ट्रबुलेंस का पता लगाने और गंभीर मौसम पूर्वानुमान केलिए कई वायुमंडलीय अवलोकन प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है। स्काईकास्ट प्रणाली अत्याधुनिक वायुमंडलीय रिमोट सेंसिंग प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करती है, जिनमें रडार विंड प्रोफाइलर, एसओडीएआर, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर और सीएल61 लिडार बेस्ड सीलोमीटर शामिल हैं, ताकि व्यापक वास्तविक समय की वायुमंडलीय जानकारी प्रदान की जा सके। उन्होंने कहाकि यह सुविधा रनवे पर निगरानी और चेतावनी क्षमताओं को मजबूत करेगी, जिससे टेकऑफ और लैंडिंग अधिक सुरक्षित हो जाएगी। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि स्काईकास्ट का मुख्य आधार एक उन्नत बाउंड्री लेयर रडार विंड प्रोफाइलर है, जो हवाई अड्डे से लगभग 3 किलोमीटर ऊपर तक हवा की गति, दिशा, ट्रबुलेंस, ऊर्ध्वाधर वेग और बाउंड्री लेयर की गतिशीलता को लगातार मापता है। विमान के उतरने और लैंडिंग के दौरान ये पैरामीटर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जहां सटीक वायुमंडलीय जानकारी सुरक्षा को बेहतर बनाने में सहायक होती है।
स्काईकास्ट सुविधा में ग्राउंडबेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर जैसे उन्नत कोहरे की निगरानी करने वाले उपकरण भी शामिल हैं, जो कोहरे की बूंदों, एरोसोल और एरोसोल कोहरे की परस्पर क्रियाओं के बारेमें विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि यह दिल्ली जैसे शहरों केलिए विशेष रूपसे महत्वपूर्ण है, जहां प्रदूषण के कण कोहरे केसाथ परस्पर क्रिया करते हैं और दृश्यता की स्थिति को प्रभावित करते हैं। स्काईकास्ट प्रणाली में सीएल61 लिडार आधारित सीलोमीटर भी एकीकृत है, जो कोहरे की ऊर्ध्वाधर संरचना की निरंतर निगरानी करता है। इससे कोहरे के बनने, दृश्यता में कमी और विमानन संचालन को प्रभावित करने वाली वायुमंडलीय स्थितियों को समझने में मदद मिलती है। स्काईकास्ट कोहरे, एरोसोल, ट्रबुलेंस, नमी, दृश्यता और वायुमंडलीय स्थितियों के वास्तविक समय के मापों को एक उन्नत विमानन मौसम सूचना प्रणाली में एकीकृत करता है। यह पायलटों, एयरलाइनों, हवाई अड्डे के संचालकों और हवाई यातायात प्रबंधन एजेंसियों को सटीक पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी सेवाएं प्रदान करेगी।
स्काईकास्ट प्रणाली का वैज्ञानिक आधार विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट है, जिसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय केतहत आईआईटीएम और आईएमडी ने संयुक्त रूपसे 2015 में आईजीआई हवाई अड्डे पर शुरू किया था। वाईएफईएक्स ने कोहरे के निर्माण, एरोसोल-बादल की परस्पर क्रिया, दृश्यता में कमी और शहरी सीमापरत प्रक्रियाओं की महत्वपूर्ण समझ विकसित की, जिसने अगली पीढ़ी के परिचालन प्रणाली के विकास में योगदान दिया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ एम रविचंद्रन ने कहाकि स्काईकास्ट सुविधा न केवल विमानन संचालन में सहयोग देगी, बल्कि भारत की समग्र मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को भी मजबूत करेगी। उन्होंने कहाकि ऐसे उन्नत उपकरणों से उत्पन्न हवा, आर्द्रता और तापमान के ऊर्ध्वाधर प्रोफाइल से भविष्य के मौसम पूर्वानुमानों में सुधार होगा। उन्होंने कहाकि मिशन मौसम के तहत मौसम प्रणालियों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए डॉप्लर मौसम रडार और इसी तरह की प्रणालियों सहित उन्नत अवलोकन नेटवर्क का देशभर में विस्तार किया जा रहा है।
डॉ एम रविचंद्रन ने कहाकि ऐसी सुविधाओं से उच्चगुणवत्ता वाला वायुमंडलीय डेटा मिलेगा, जिससे आनेवाले वर्ष में पूर्वानुमान की सटीकता में काफी सुधार होगा। उन्होंने कहाकि इन प्रौद्योगिकियों को हवाई अड्डों पर तेजीसे तैनात किया जाएगा, साथही पूर्वानुमान क्षमताओं को और बेहतर बनाने केलिए विमान आधारित अवलोकनों को भी एकीकृत किया जाएगा। स्काईकास्ट अवलोकन उन्नत पूर्वानुमान मॉडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सक्षम निर्णय समर्थन प्रणालियों, शहरी मौसम पूर्वानुमान, प्रदूषण प्रबंधन, परिवहन परामर्श और आपदा तैयारी पहलों को भी सहायता प्रदान करेगी। मिशन मौसम केतहत स्काईकास्ट प्रणाली मौसम अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण, विमानन क्षमता को मजबूत करने और वैज्ञानिक नवाचार से सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय सेवाएं सुनिश्चित करने केप्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उद्घाटन समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, जीएमआर के वरिष्ठ अधिकारी और विमानन क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित थे।