भारत में जमीनी स्तर के शासन में हो रही मूकक्रांति की सराहना की
विकसित भारत युवा संसद-2026 में देशभर से आए युवा प्रतिभागीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 17 June 2026 04:55:01 PM
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संविधान सदन में विकसित भारत युवा संसद-2026 में देशभर से आए युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा हैकि युवा लोकतंत्र का उज्ज्वल भविष्य हैं। उन्हें राष्ट्र में नवाचार का मूल प्रेरक शक्तिस्रोत बताते हुए ओम बिरला ने कहाकि भावी पीढ़ी में देश में बदलाव केलिए आवश्यक अद्वितीय ऊर्जा और नया संकल्प मौजूद है। उन्होंने कहाकि नैतिकता, आध्यात्मिकता और लोकतांत्रिक संवाद से समृद्ध भारत का अनूठा सामाजिक ताना-बाना स्वाभाविक रूपसे युवा नागरिकों को सार्वजनिक जीवन केलिए तैयार करता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह कियाकि वे अपनी नवाचारी क्षमताओं और सेवा भावना को देश को अभूतपूर्व वैश्विक ऊंचाइयों की ओर लेजाने में लगाएं। उन्होंने प्रतिभागियों को याद दिलायाकि सच्चा नेतृत्व सहानुभूति और उन नागरिकों केप्रति पूर्ण जवाबदेही में निहित है, जिनका वे प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि संविधान सदन के भीतर युवा नेताओं की यह सभा अगली पीढ़ी के मन में लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की एक सशक्त भावना प्रज्वलित करेगी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संविधान सदन भारत की महान लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतीक है। ओम बिरला ने युवाओं से आग्रह कियाकि वे इस ऐतिहासिक स्थल से प्रेरणा लेकर विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहाकि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है और यह भारत के नागरिकों का मार्गदर्शन करता है। यह कार्यक्रम युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने लोकसभा सचिवालय के संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) के सहयोग से आयोजित किया था। भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की व्यापक भागीदारी को रेखांकित करते हुए ओम बिरला ने बतायाकि पांच मिलियन से अधिक युवा सक्रिय रूपसे युवा संसद कार्यक्रम से जुड़ गए हैं। ओम बिरला ने कहाकि यहां विभिन्न राज्यों, भाषाओं और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से युवा मौजूद हैं और सभी विकसित भारत के साझा संकल्प से जुड़े हैं। उन्होंने कहाकि वर्ष 2047 तक विकसित भारत को साकार करने का दायित्व युवाओं पर है और इसमें युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय की भूमिका सराहनीय है।
ओम बिरला ने कहाकि यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद और नए नेतृत्व को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहाकि स्वतंत्रता केबाद अनेक विविधताओं के बावजूद भारत ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूपमें सफलता प्राप्त की है। ओम बिरला ने कहाकि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था बाहर से ली गई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह प्राचीन सभाओं और समितियों से विकसित हुई है, जिसने 75 वर्ष से निरंतर मजबूत होती जनभागीदारी और ठोस संस्थागत विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। ओम बिरला ने भारतीय संविधान के दूरदर्शी निर्माताओं की सराहना करते हुए कहाकि उन्होंने गणतंत्र की स्थापना के समय से ही सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए थे। उन्होंने कहाकि संविधान में समाज के हरवर्ग केलिए समानता, न्याय और समान अवसर के सिद्धांतों को शामिल किया गया है। उन्होंने विशेष रूपसे भारत में वयस्क मताधिकार को तुरंत अपनाए जाने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहाकि कई देशों में जहां महिलाओं को मताधिकार बहुत बादमें मिला के विपरीत भारत ने शुरुआत से ही पूर्ण समानता के इस सिद्धांत को लागू कर दिया था।
ओम बिरला ने वैश्विक और घरेलू स्तरपर नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बतायाकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से लेकर कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा तक हर क्षेत्र में महिलाएं पारंपरिक बंधनों को तोड़कर सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहाकि लोकतांत्रिक और आर्थिक भागीदारी में होनेवाली यह समावेशी वृद्धि हमारे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया केलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत में जमीनी स्तर के शासन में हो रही मूकक्रांति की सराहना करते हुए बतायाकि कई राज्यों में स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूपसे 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ओम बिरला ने कहाकि ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम उच्चतम विधायी स्तरों पर भी इसी प्रकार की सफलता प्राप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहाकि यह अधिनियम लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को स्थायी रूपसे मजबूत करेगा और भारत के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल देगा। इस अवसर पर युवा मामले और खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडविया, लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह और युवा मामले और खेल मंत्रालय की सचिव डॉ पल्लवी जैन गोविल भी उपस्थित थे।