राष्ट्रपति ने आचार्य सुश्रुत की जयंती पर किया सौश्रुतम् का उद्घाटन
'आयुर्वेद की समग्र जीवन दृष्टि मानवकल्याण के लिए एक वरदान है'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 15 July 2026 03:52:56 PM
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज आचार्य सुश्रुत की जयंती पर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली में 'सौश्रुतम् 2026' शल्य तंत्र पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं वार्षिक सुश्रुत जयंती समारोह का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति ने शल्य चिकित्सा के जनक माने जानेवाले आचार्य सुश्रुत की जयंती पर आयुर्वेद से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहाकि सदियों पहले आचार्य सुश्रुत ने जब शल्य चिकित्सा पद्धति का सूत्रपात किया था, तब वह अपने समय की एक क्रांति से कम नहीं था। राष्ट्रपति ने कहाकि आचार्य सुश्रुत अनेक जटिल एवं नवाचारपूर्ण शल्य क्रियाओं के प्रवर्तक के रूपमें प्रसिद्ध हैं, उन्होंने अपने समय में प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद सर्जरी, ट्यूमर के उपचार और ईएनटी सर्जरी जैसे अनेक क्षेत्रों में नई पद्धतियों का प्रवर्तन किया। उन्होंने कहाकि उनकी सुश्रुत संहिता ने केवल भारतीय उपमहाद्वीप को ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को एक नई दिशा प्रदान की है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि अपनी परंपरा में निहित मानवकल्याण केलिए उपयोगी ज्ञान को बदलते समय केसाथ सामंजस्य बिठाते हुए आगे बढ़ाना समाज केलिए हितकर होगा। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि आयुर्वेद की समग्र जीवन दृष्टि मानवता केलिए एक वरदान है, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिएकि यह प्राचीन ज्ञान वर्तमान समय केसाथ प्रासंगिक और प्रभावी बना रहे। उन्होंने जिक्र कियाकि भारत सरकार ने आयुर्वेद और योग को विश्व पटल पर नई ऊर्जा केसाथ प्रतिष्ठित किया है। राष्ट्रपति को प्रसन्नता हुईकि सरकार शल्य चिकित्सा की प्राचीन परंपरा को भी वैज्ञानिक कसौटियों के सभी मानकों पर सफल करने केलिए प्रयासरत है। उन्होंने कहाकि मानकीकृत दस्तावेज़ीकरण, डिजिटल हैल्थ एकीकरण और आधुनिक विज्ञान की अनुसंधान तकनीकों का सम्यक उपयोग करने से इस प्रणाली की व्यापक वैश्विक स्वीकृति को बल मिलेगा।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से कहाकि आयुर्वेद का भविष्य उनके हाथों में है और उन्हें सुझाव दियाकि वे जिज्ञासा, सत्यनिष्ठा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण केसाथ व्यावहारिक शोध और अपने क्षेत्रमें उच्चकोटि के साक्ष्य निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ें। उन्होंने कहाकि जहां-जहां उपयुक्त हो वहां उन्हें नई तकनीकों का उपयोग करने से नहीं हिचकना चाहिए। द्रौपदी मुर्मु ने आग्रह कियाकि वे आचार्य सुश्रुत के दिखाए मार्ग पर चलते हुए चिकित्सा में नैतिकता और रोगियों केप्रति करुणामय सेवा के अपने संकल्प पर सदैव अडिग रहें। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त कियाकि 'सौश्रुतम् 2026' में होनेवाले विचार-विमर्श से आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा क्षेत्रमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा। उन्होंने कहाकि ऐसे सार्थक आयोजनों से समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में आयुर्वेद के योगदान को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के एमआरआई सेक्शन का भी उद्घाटन किया। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत एवं और कई देशों के जाने-माने सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।