'शांति विकास व मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा से जम्मू कश्मीर फलफूल रहा'
दिल्ली में कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलिस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 27 July 2026 01:23:15 PM
नई दिल्ली। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने भारत के विभाजन को ‘इतिहास की सबसे बड़ी भूल’ बताते हुए कहा हैकि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू कश्मीर (पीओजेके) को वापस लेना ही भारत और पाकिस्तान केबीच एकमात्र लंबित मुद्दा है। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का सुरक्षा परिदृश्य एक निर्णायक बदलाव से गुज़रा है और बाहरी आक्रमण के खिलाफ प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण से निर्णायक एवं सक्रिय जवाबी कार्रवाई में परिवर्तित हुआ है। डॉ जितेंद्र सिंह कश्मीरी सांस्कृतिक केंद्र नई दिल्ली में 'जम्मू-कश्मीर पीपल्स फोरम' और 'पीओजेके यूथ फोरम' (जो मीरपुर बलिदान भवन समिति की एक इकाई है) के सहयोग से 27वें कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कारगिल विजय दिवस को याद करने और देश केलिए नए संकल्प का दिन बताते हुए कहाकि यह जीत भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस, एकता संप्रभुता एवं अखंडता की रक्षा केप्रति देश की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि कारगिल से मिली सीख आजभी प्रासंगिक है, क्योंकि देश के सामने आनेवाली चुनौतियों केलिए लगातार सतर्क रहने और राष्ट्रीय एकता कायम रखने की आवश्यकता बनी हुई है। कारगिल युद्ध के ऐतिहासिक संदर्भ की बात करते हुए राज्यमंत्री ने कहाकि 1999 की घटनाओं को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता, बल्कि इन्हें बंटवारे के समय से शुरू हुए घटनाक्रमों की एक लंबी कड़ी के हिस्से के रूपमें देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहाकि इस निर्णय से लोगों को बहुत तकलीफ़ें झेलनी पड़ीं, लाखों लोग बेघर हो गए और दशकों तक चलने वाली दुश्मनी की नींव पड़ी, इसमें 1947, 1965, 1971 और कारगिल की लड़ाइयां, लगातार सीमापार आतंकवाद और छद्मयुद्ध शामिल हैं। उन्होंने आज़ाद भारत में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को भी सबसे गंभीर मानवीय त्रासदियों में से एक करार दिया। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि बीते दशक में भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की सोच में बुनियादी बदलाव किया है, आतंकवाद केप्रति 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है, सीमा प्रबंधन को मजबूत किया है और सुरक्षा की सक्रिय रणनीति अपनाई है, जो बाहरी हमले का निर्णायक जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहाकि इस बदलाव ने राष्ट्रीय आत्मविश्वास को बहुत बढ़ावा दिया है और भारत की अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की क्षमता को मजबूत किया है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि शांति, विकास एवं मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा से जम्मू कश्मीर फलफूल रहा है। उन्होंने हाल के वर्ष में जम्मू कश्मीर में आए अभूतपूर्व बदलाव का जिक्र करते हुए प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिनमें कश्मीर घाटी केलिए रेल संपर्क, दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज, नए एम्स संस्थान, लंबे समय से लंबित सिंचाई परियोजनाएं और तेज़ विकास पहलें शामिल हैं, जिनसे जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और जनता का विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कहाकि लगातार शांति से तीव्र विकास संभव हुआ है, जबकि विकास खुद स्थायी स्थिरता केलिए एक मजबूत शक्ति के रूपमें उभरा है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि देश में रक्षा उत्पादन में बढ़ती आत्मनिर्भरता ने राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत किया है। उन्होंने कहाकि भारत ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बहुत हद तक बढ़ाया है, उन्नत रणनीतिक क्षमताएं विकसित की हैं और रक्षा उपकरणों का एक महत्वपूर्ण निर्यातक बनकर उभरा है, जो देश की तकनीकी प्रगति एवं और रणनीतिक आत्मविश्वास को दर्शाता है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि जम्मू कश्मीर में विकास की गति पाकिस्तान नियंत्रित जम्मू कश्मीर के लोगों केलिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।
भारत और पाकिस्तान केबीच वर्ष 1994 के सर्वसम्मत संसदीय प्रस्ताव को याद करते हुए उन्होंने कहाकि दोनों देशों के मध्य पाकिस्तान नियंत्रित जम्मू कश्मीर की वापसी के अलावा कोई मुद्दा नहीं है और यह दोहरायाकि पीओजेके भारत का अभिन्न हिस्सा है। कारगिल युद्ध के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने युवा पीढ़ी से उनके साहस, देशभक्ति एवं निस्वार्थ बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहाकि कारगिल की भावना हर भारतीय को एक मजबूत, सुरक्षित, आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में काम करने केलिए प्रेरित करती है, साथही भारत की एकता, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के सामूहिक संकल्प पर अडिग रहने केलिए भी प्रेरित करती है। जम्मू कश्मीर पीपल्स फ़ोरम के संयोजक महिंदर मेहता और पीओजेके यूथ फ़ोरम की अगुवाई में आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद बांसुरी स्वराज, कारगिल युद्ध के दौरान अनुकरणीय सेवा देने वाले सैनिक कर्नल केके शर्मा और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।