'प्रकृति से प्रेरणा लें और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाएं'
वन मंत्री भूपेंद्र यादव का वैश्विक बाघ दिवस समारोह में संबोधनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 29 July 2026 02:45:09 PM
नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के नई दिल्ली में वैश्विक बाघ दिवस 2026 समारोह को संबोधित किया। भूपेंद्र यादव ने प्रकृति केसाथ लोगों से गहरे सामाजिक जुड़ाव और संरक्षण उन्मुख जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। भूपेंद्र यादव ने भारत में बाघ संरक्षण उपलब्धियों का जश्न मनाते हुए बाघों और उनके आवासों की रक्षा केप्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराया। भूपेंद्र यादव ने कहाकि संरक्षण का अर्थ केवल वन्यजीवों की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि प्रकृति केसाथ सम्मानजनक संबंध विकसित करना भी है। उन्होंने कहाकि प्रकृति केवल पर्यटन या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों को प्रकृति से प्रेरणा लेने और पर्यावरण संरक्षण केप्रति समर्पित जीवनशैली अपनाने केलिए प्रोत्साहित किया।
भारत में बाघ संरक्षण उपलब्धियों पर भूपेंद्र यादव ने कहाकि बाघों (3682) और बाघ अभ्यारण्यों (58) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहाकि 12 वर्ष में हाथी अभ्यारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभ्यारण्यों, संरक्षित क्षेत्रों, सामुदायिक अभ्यारण्यों और आर्द्रभूमि की संख्या में भी वृद्धि हुई है। एनटीसीए के पर्यावरण-पर्यटन वेबपेज का शुभारंभ करते हुए भूपेंद्र यादव ने बाघ अभ्यारण्यों से संबंधित जानकारी को एकीकृत मंच पर लाने केलिए एनटीसीए को बधाई दी। यह सफारी और आवास बुकिंग केलिए बाघ अभ्यारण्यों की प्रामाणिक वेबसाइटों के सीधे लिंक प्रदान करता है, जिससे जानकारी अधिक सुलभ हो जाती है, साथही जिम्मेदार और टिकाऊ प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। भूपेंद्र यादव ने कहाकि वनों की कहानियां केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इनमें पारंपरिक ज्ञान, भावनाएं, वन्यजीव संरक्षण केप्रति जुनून और वन्यजीव अधिकारियों, संरक्षणवादियों आदि के वर्षों के अनुभव शामिल हैं। उन्होंने वन अधिकारियों से वन्यजीव संरक्षण के बारेमें अधिक लिखने और अपने अनुभवों को इस तरह साझा करने का आग्रह किया, जिससे व्यावहारिक और लागू करने योग्य नीतिगत समाधानों में योगदान मिल सके।
वनमंत्री भूपेंद्र यादव ने वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल करते हुए वन अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता निर्माण आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की भूमिका पर प्रकाश डाला। समारोह में बाघ संरक्षण केलिए जमीनी स्तरपर काम करने वालों के योगदान को मान्यता देते हुए एनटीसीए पुरस्कार वन्यजीव अधिकारियों और योगदानकर्ताओं को बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन में उनके अनुकरणीय कार्य केलिए प्रदान किए गए। वनमंत्री ने दिल्ली-एनसीआर के स्कूली बच्चों केलिए 'बाघ बचाओ' विषय पर चित्रकला, रेखाचित्र, नारा लेखन और मुखौटा बनाने की प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। पर्यावरण मंत्रालय के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम केतहत इको-क्लबों से एक राष्ट्रव्यापी बाघ संरक्षण जागरुकता अभियान भी चलाया गया, जिसमें बाघ अभ्यारण्यों के निकट विद्यालयों पर विशेष ध्यान दिया गया।
वैश्विक बाघ दिवस समारोह में पांच प्रकाशन जारी किए गए, जो विज्ञान आधारित संरक्षण, ज्ञान साझाकरण और जन जागरुकता पर एनटीसीए के निरंतर जोर को दर्शाते हैं। इनमें एनटीसीए आउटरीच जर्नल स्ट्राइप्स का जुलाई 2026 संस्करण, 24 बाघ अभ्यारण्यों की सुरक्षा लेखापरीक्षा रिपोर्ट, भारत में बाघ अभ्यारण्यों में सुस्त भालुओं केलिए आवास उपयुक्तता मूल्यांकन पर एक रिपोर्ट, आईबीसीए और जीटीएफ की प्रकाशित 'टाइगर्स ऑफ द वर्ल्ड', चंद्रप्रकाश गोयल और सत्य प्रकाश यादव की लिखित 'द रहमान खेड़ा टाइगर' शामिल हैं। वैश्विक बाघ दिवस 2026 समारोह ने उत्कृष्टता की मान्यता, वैज्ञानिक प्रबंधन, क्षमता निर्माण, जिम्मेदार पर्यावरण पर्यटन, ज्ञान साझाकरण और देश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत की रक्षा में अधिक सार्वजनिक भागीदारी से बाघ संरक्षण केप्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। कार्यक्रम में पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, वरिष्ठ अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, वन विभाग के कर्मचारी, छात्र और हितधारक उपस्थित थे।
गौरतलब हैकि एक शताब्दी पूर्व एशियाभर में अनुमानित 10 लाख जंगली बाघ विचरण करते थे। आज वे अपने ऐतिहासिक क्षेत्र के 8 प्रतिशत से भी कम हिस्से में पाए जाते हैं और तीन उपप्रजातियां बाली, जावन और कैस्पियन बाघ विलुप्त हो चुकी हैं। बाघों की आबादी में गिरावट के प्रमुख कारण अवैध शिकार, वन्यजीवों का अवैध व्यापार, आवास का क्षरण और विखंडन, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन हैं। सामूहिक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता को पहचानते हुए 13 बाघ रेंज देशों के नेता 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग बाघ शिखर सम्मेलन में एकसाथ आए और वैश्विक बाघ पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम की शुरुआत की। वैश्विक बाघ दिवस प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है, इसका महत्वाकांक्षी लक्ष्य 2022 तक वैश्विक जंगली बाघों की आबादी को दोगुना करना है। वैश्विक बाघ दिवस बाघ संरक्षण के बारेमें जागरुकता बढ़ाने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने, सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और बाघों व उनके आवासों की रक्षा में हुई प्रगति की समीक्षा करने केलिए एक वैश्विक मंच के रूपमें कार्य करता है।