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युवा 'राष्ट्र प्रथम' सिद्धांत पर चलें-उपराष्ट्रपति

एसआरएमआईएसटी के दीक्षांत में पदक और उपाधियां प्रदान कीं

'युवा अनुसंधानों को व्यावहारिक समाधानों और अवसरों में बदलें'

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Monday 17 August 2026 02:37:30 PM

medals and degrees awarded at srmist convocation

चेन्नई। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने चेंगलपट्टू के कट्टनकुलथुर में एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एसआरएमआईएसटी) के 22वें दीक्षांत समारोह में कहा हैकि भारत की सबसे बड़ी शक्ति विशेषकर युवा हैं, वे अपने उज्जवल भविष्य को आकार और विस्तार देने की तैयारी करें। उन्होंने स्नातकों से कहाकि वे ‘राष्ट्र प्रथम’ सिद्धांत पर राष्ट्र निर्माण केलिए अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार का उपयोग करें। उपराष्ट्रपति ने कहाकि दीक्षांत समारोह मात्र उपाधि प्राप्त करने से कहीं अधिक है, यह वर्षों की लगन, अनुशासन और ज्ञान का उत्सव है, साथही यह जीवनभर की जिम्मेदारी और सेवा यात्रा की शुरुआत का भी प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अंतरविषयक शिक्षा, रचनात्मकता, उद्यमिता और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ाने वाले शैक्षणिक वातावरण केलिए एसआरएमआईएसटी की सराहना की। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्‍टर अनुसंधान, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और सतत विकास पर संस्थान के बढ़ते ध्यान का उल्‍लेख करते हुए कहाकि ये क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को रूप देंगे। उपराष्ट्रपति ने अनुसंधान को व्यावहारिक समाधानों और अवसरों में बदलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहाकि अनुसंधान तभी अपने उद्देश्य को प्राप्त करता है, जब उसका समाज और देश को लाभ हो। उपराष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी का जिक्र कियाकि जिसमें भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने कहाकि भारत ने मानवीय सहायता का व्यवसायीकरण करने का कभी भी प्रयास नहीं किया। उन्होंने हाल ही में केन्या के स्पीकर केसाथ हुई बातचीत को याद करते हुए कहाकि कोविड महामारी में कई पश्चिमी देशों ने गरीब देशों को इस तरह की सहायता प्रदान नहीं की, जैसे भारत ने की। उन्होंने कहाकि भारत ने मानवता की रक्षा में हमेशा मदद की है और भारत सदैव शांति, विकास और मानव कल्याण केलिए प्रतिबद्ध है।
सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा थाकि एम्स पूरे देश में होने चाहिएं, ताकि चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा भारतभर के लोगों तक पहुंच सके। उपराष्ट्रपति ने 2014 से देश में उच्चशिक्षा के विस्तार पर कहाकि इस अवधि में 16 आईआईआईटी, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 आईआईएम, 7 आईआईटी, 2 आईआईएसईआर, 1 एनआईटी और 12 एम्स स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहाकि भारत में 1425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54000 कॉलेज और 16850 स्वतंत्र संस्थान हैं। सीपी राधाकृष्णन ने उच्चशिक्षा में महिलाओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रसन्नता जताई और कहाकि दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक प्राप्त करने वाली लड़कियों की बढ़ती संख्या एक उत्साहजनक और स्वागत योग्य कदम है। सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि युवा विकसित भारत@2047 की यात्रा में एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहे हैं और एक विकसित, नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना प्रत्येक युवा भारतीय से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान करती है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने छात्रों से सभी प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने को कहा और जीवनशैली में उत्कृष्टता को चुनने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने संवैधानिक मूल्य बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने को कहा। उपराष्ट्रपति ने महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के ऑटोमोटिव बिजनेस अध्यक्ष आर वेलुसामी को मानद उपाधि प्रदान की और स्नातकों को पदक, रैंक और उपाधियां दीं। उन्होंने छात्रों को ‘नशीली दवाओं को ना कहें’ की शपथ भी दिलाई। दीक्षांत समारोह में तमिलनाडु और केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, एसआरएमआईएसटी के कुलाधिपति डॉ टीआर पारिवेंधर, चांसलर (प्रशासन) डॉ रवि पचामुथु, चांसलर (अकादमिक) डॉ पी सत्यनारायणन, कुलपति डॉ सी मुथमिज़्चेलवन और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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