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एनसीसी की दुर्गम पदयात्रा 'अपराजिता' शुरू

महिला सेना अधिकारियों के नेतृत्व में एनसीसी कैडेट्स रवाना

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने युवा कैडेट्स का मनोबल बढ़ाया

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 18 August 2026 03:04:51 PM

ncc's arduous trek 'aparajita' begins

नई दिल्ली। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की प्रमुख साहसिक अखिल भारतीय बालिका अधिक ऊंचाई दुर्गम पदयात्रा 'अपराजिता-परंग ला 2026' दिल्ली से रवाना हुई। यह पदयात्रा परंग ला दर्रे (5,578 मीटर, 18,300 फीट) से गुजरेगी। यह हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है, जो देश के सबसे चुनौतीपूर्ण उच्च ऊंचाई वाले दुर्गम पदयात्रा मार्गों में से एक माना जाता है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम में इसे रवाना किया। इस दल का नेतृत्व तीनों सेनाओं की तीन महिला अधिकारी कर रही हैं। इस दुर्गम और कठिन अभियान में 28 कैडेट हैं, जिनकी औसत आयु 19 वर्ष है और सबसे कम उम्र की प्रतिभागी मात्र साढ़े 16 वर्ष की है। इस अवसर पर रक्षामंत्री ने इतनी उच्च ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण अभियान में युवा लड़कियों की भागीदारी को देश की युवा कैडेट्स के साहस, दृढ़ संकल्प और बढ़ती क्षमताओं का सशक्त प्रमाण बताया।
एनसीसी कैडेट्स की अपराजिता पदयात्रा में अधिकारियों, चिकित्सा कर्मी, प्रशिक्षक और सहायक कर्मचारी हैं। अभियान दल हिमालय के कुछ सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण इलाकों से होते हुए लगभग 250 किलोमीटर की दूरी 30 दिन में तय करेगा। अभियान के मार्ग में किब्बर, दुमला, थलटक, बोंगरोजेन, परांग ला दर्रा, डाक कारज़ोंग, नोर्बू सुम्दो, कियांगडोम और कोरज़ोक शामिल हैं। ये उच्च ऊंचाई वाले रेगिस्तानों, ग्लेशियरों, बर्फ के मैदानों और नदी घाटियों के पार हैं। राजनाथ सिंह ने अभियान दल को सुरक्षित और सफल ट्रेक केलिए शुभकामनाएं देते हुए कहाकि इस तरह के अभियान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चयनित कैडेटों की शारीरिक और मानसिक तैयारी की सराहना की और कहाकि यह ट्रेक उनके लिए दृढ़ता, आत्मविश्वास और खोज की एक जीवन स्मृति होगा।
रक्षामंत्री ने आशा व्यक्त कीकि कैडेट परांग ला से न केवल यादगार अनुभव लेकर लौटेंगे, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति की गहरी समझ भी प्राप्त करेंगे। उन्होंने दल के सदस्यों से आग्रह किया कि वे पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों केसाथ संपर्क को प्राथमिकता दें। उन्होंने कैडेटों से कहाकि वे प्रशिक्षकों के निर्देशों का पालन करें, अनावश्यक जोखिमों से बचें और हिमालयी पर्यावरण की रक्षा केलिए कोई कचरा नहीं छोड़ने का दृष्टिकोण अपनाएं। स्थानीय समुदायों केसाथ सम्मानपूर्वक जुड़ें, उनकी संस्कृति और परंपराओं को समझें और उनके अनुभवों से सीखें। उन्होंने कहाकि यह अभियान कैडेट्स के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा और उन्हें जीवन के हर पड़ाव पर 'अपराजिता' बने रहने के लिए प्रेरित करेगा।
राजनाथ सिंह ने भूमि जल और वायु में साहसिक गतिविधियों में एनसीसी कैडेटों की बढ़ती उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने नारीशक्ति की भावना प्रदर्शित करने वाली महिला कैडेटों की सराहना की। रक्षामंत्री ने अखिल भारतीय एनसीसी निदेशालयों से कैडेटों की भागीदारी पर जोर देते हुए कहाकि उनकी विविध भाषाएं, संस्कृतियां और पृष्ठभूमियां, एक साझा मिशन से एकजुट होकर 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। इस अवसर पर एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स और एनसीसी एवं रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह अभियान दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। भाबा-पिन घाटी क्षेत्र में तैयारी और अनुकूलन केलिए एक ट्रेक आयोजित किया गया, जिसके बाद योग्यता के आधार पर एनसीसी महिला कैडेटों की अंतिम टीम का चयन किया गया। अभियान का उद्देश्य एनसीसी महिला कैडेटों में नारी शक्ति, नेतृत्व, आत्मविश्वास, टीम वर्क, सहनशक्ति और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है।

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