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जापानी व्यवसायियों की भारत में निवेश साझेदारियां

उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सम्मेलन में सीएम योगी का निवेश का आह्वान

भारत और जापान की निवेश साझेदारियां जमीन पर उतर रहीं-गोयल

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 19 August 2026 02:27:34 PM

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सम्मेलन-2026 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी व्यवसायियों से भारत में भारत-जापान साझेदारी और अपने निवेश को और ज्यादा बढ़ाने का आह्वान किया। इस अवसर पर पीयूष गोयल ने कहाकि भारत जापान की हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति, प्रगति और समृद्धि की साझा आकांक्षाओं पर आधारित घनिष्ठ और दीर्घकालिक साझेदारी है। उन्होंने कहाकि यामानाशी प्रीफेक्चर के प्रतिनिधिमंडल की भारत में उपस्थिति भारत के राज्यों और क्षेत्रों तक द्विपक्षीय साझेदारी की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है। पीयूष गोयल ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय रूपांतरण केलिए रेखांकित सात क्षेत्र-विनिर्माण, कृषि, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और रक्षा, हरित और नीली अर्थव्यवस्था तथा भारत के सभ्यतागत सॉफ्टपावर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारत और जापान की क्षमताएं एकदूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहाकि यह साझेदारी आर्थिक विकास से आगे बढ़कर वैश्विक प्रगति में विश्वसनीय भागीदार बनने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उत्तर प्रदेश की बढ़ती आर्थिक क्षमता पर पीयूष गोयल ने कहाकि राज्य 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में काम कर रहा है, उत्तर प्रदेश की बड़ी और आकांक्षी आबादी, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक गति और कुशल कार्यबल जापानी प्रौद्योगिकी एवं विशेषज्ञता को भारत के युवा कार्यबल और बढ़ते बाजार केसाथ जोड़ने केलिए मजबूत मंच प्रदान करते हैं। जुलाई 2026 में दिल्ली में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने कहाकि अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश करने का जापान का लक्ष्य है। उन्होंने कहाकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, बैटरी, ऊर्जा और अगली पीढ़ी की मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश दोनों अर्थव्यवस्थाओं के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पीयूष गोयल ने कहाकि बढ़ती भारत-जापान साझेदारी का प्रभाव जमीन पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना, दिल्ली, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में जापानी सहायता से विकसित मेट्रो प्रणालियों, आठ राज्यों में 11 जापानी औद्योगिक टाउनशिप का उल्लेख किया।
पीयूष गोयल ने कहाकि वर्तमान में 1,400 से अधिक जापानी कंपनियां भारत में कार्यरत हैं, जिनमें मोबिलिटी क्षेत्र में सुजुकी, टोयोटा और होंडा, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रमें सोनी एवं इंजीनियरिंग क्षेत्रमें हिताची और मित्सुबिशी जैसे जाने-माने नाम शामिल हैं। उन्होंने कहाकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27.5 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि जापान अब भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत है, जो आर्थिक संबंधों के और विस्तार केलिए मजबूत आधार को दर्शाता है। जापानी दर्शन ‘काइज़ेन’ का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने कहाकि भारत की सुधार यात्रा भी निरंतर सुधार की इसी भावना को दर्शाती है। उन्होंने निवेश और विकास केलिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करने के भारत के प्रयासों केतहत कारोबार सुगमता, बुनियादी ढांचे, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, बहु माध्यम लॉजिस्टिक्स और जापानी भाषा की क्षमताओं के विस्तार से संबंधित सुधारों को रेखांकित किया।
पीयूष गोयल ने कहाकि भारत की तीसरी सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था उत्तर प्रदेश में 90 लाख से अधिक एमएसएमई हैं और यह राज्यों में पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है। उन्होंने कहाकि एस्कॉर्ट्स कुबोटा और सीको एडवांस जैसी कंपनियां पहले से ही राज्य के विनिर्माण तंत्र में योगदान दे रही हैं। पीयूष गोयल ने जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, यमुना एक्सप्रेसवे और जेआईसीए समर्थित पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे केसाथ-साथ रक्षा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में 27 औद्योगिक क्लस्टरों और इकोसिस्टम को प्रमुख ताकतों के रूपमें रेखांकित किया, जो उत्तर प्रदेश को जापान केसाथ गहरी साझेदारी केलिए एक आशाजनक गंतव्य के रूपमें स्थापित करते हैं। पीयूष गोयल ने कहाकि वह इन चर्चाओं को सरकार और उद्योग के उच्चतम स्तरपर आगे बढ़ाने, भारत जापान में विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने केलिए 24 से 27 अगस्त 2026 तक जापान की यात्रा करेंगे। भारत और जापान केबीच सभ्यतागत संबंधों पर पीयूष गोयल ने बुद्ध की शिक्षाओं के माध्यम से भारत और जापान केबीच ऐतिहासिक संबंधों को याद किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन में कहाकि भारत-जापान के रणनीतिक विजन को अब उत्तर प्रदेश और जापानी उद्योग केबीच निवेश, नवाचार, विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी से एक ठोस आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी में बदलने का यह सबसे बेहतर समय है। उन्होंने कहाकि जापान उगते सूरज की भूमि है और उत्तर प्रदेश सूर्यवंश की भूमि है, श्रीराम की भूमि है, श्रीकृष्ण की भूमि है, बुद्ध की भूमि है, असीमित संभावनाओं की भूमि है। उन्होंने कहाकि उत्तर प्रदेश को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश के प्रमुख केंद्र के रूपमें स्थापित करने का कार्य निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने कहाकि निवेश, नवाचार और औद्योगिक विकास केलिए अनुकूल वातावरण के चलते प्रदेश में देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियां निवेश केलिए आगे आ रही हैं। उन्होंने कहाकि उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सम्मेलन 2026 के माध्यम से उत्तर प्रदेश और जापान केबीच आर्थिक साझेदारी को नई गति प्रदान की जा रही है। योगी आदित्यनाथ ने कहाकि जापानी निवेश और तकनीकी सहयोग से उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, रोज़गार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नई मजबूती मिलेगी।
निवेश सम्मेलन में जापान के यामानाशी प्रांत के राज्यपाल कोटारो नागासाकी सहित लगभग 200 जापानी सीईओ, प्रबंध निदेशक, कंपनी प्रमुख एवं प्रमुख निर्णयकर्ताओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। आशा व्यक्त की गईकि सम्मेलन के दौरान निवेश और रोज़गार सृजन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति मिलेगी। एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के सहयोग से सेक्टर-10 ग्रेटर नोएडा में ₹2,029 करोड़ की निवेश परियोजना से 3,800 से अधिक रोज़गार सृजित होंगे और लगभग 60,000 यूनिट ट्रैक्टर का प्रस्तावित वार्षिक उत्पादन होगा। स्पार्क माइंडा के सहयोग से सेक्टर-10 एवं 24 ग्रेटर नोएडा में ₹1,166 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, इससे लगभग 6,440 रोज़गार सृजित होंगे। परियोजना के अंतर्गत दो एवं चार पहिया वाहनों केलिए इलेक्ट्रॉनिक स्विच, सेंसर एवं यूएसबी चार्जर जैसे उत्पादों का लगभग 20 लाख यूनिट वार्षिक उत्पादन प्रस्तावित है। नई दिल्ली में जापानी प्रतिनिधिमंडल केलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने रात्रिभोज का आयोजन किया। इसमें जापानी प्रतिनिधियों के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के मंत्री एवं अधिकारी भी उपस्थित थे।

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