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सेबी अधिनियम के अनुच्‍छेद 15M में संशोधन

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Friday 11 January 2013 05:13:17 AM

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) अधिनियम 1992 के अनुच्‍छेद 15M में संशोधन के लिए आर्थिक मामलों के विभाग के प्रस्‍ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। इससे प्रतिभूति पुनर्विचार न्‍यायाधिकरण में पीठासीन अधिकारी के पद के लिए न्‍यूनतम 7 वर्षों की सेवा करने वाले निवर्तमान या सेवानिवृत्‍त उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश भी इस पद के लिए योग्‍य माने जाएंगे। सेबी अधिनियम, 1992 में संशोधन अनुमोदित अध्‍यादेश के अनुरूप किया जाएगा और अध्‍यादेश को अधिनियम में बदलने के लिए इसे संसद की आगामी सत्र में कानूनी मामलों के विभाग से विचार-विमर्श के बाद आवश्‍यक संशोधन के साथ पेश किया जाएगा।
सेबी के निर्णय के विरूद्ध सुनवाई के लिए प्रतिभूति पुनर्विचार न्‍यायाधिकरण की स्‍थापना सेबी अधिनियम, 1992 के अनुच्‍छेद 15K में की गई थी। सेबी अधिनियम, 1992 के अनुच्‍छेद 15M के तहत प्रतिभूति न्‍यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी पद के लिए उच्‍चतम न्‍यायालय के निवर्तमान या सेवानिवृत्‍त न्‍यायाधीश या उच्‍च न्‍यायालय के निवर्तमान मुख्‍य न्‍यायाधीश ही इसके लिए योग्‍य हैं। इसके कारण प्रतिभूति न्‍यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी पद के लिए चयन में कठिनाई आ रही थी और यह पद पिछले कुछ समय से लंबित चल रहा था। मंत्रिमंडल के इस निर्णय से इस पद को विशेष योग्‍यता और अनुभव कम किए बिना आसानी से भरा जा सकेगा।

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