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डीपफेक और भ्रामक सूचनाएं गंभीर चुनौती!

लोकतांत्रिक विमर्श को भ्रम और दुष्प्रचार से सुरक्षित रखें-बिरला

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एआई फॉर डेमोक्रेसी पर विशेष सत्र

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 21 February 2026 01:42:20 PM

'ai for democracy' special session at the india ai impact summit

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने डीपफेक और भ्रामक सूचना चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करके इन्हें लोकतंत्र केलिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने कहाकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग सत्य और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने केलिए किया जाना चाहिए, न कि तथ्यों को विकृत या दबाने केलिए। उन्होंने लोकतांत्रिक विमर्श को भ्रम और दुष्प्रचार से सुरक्षित रखने केलिए तकनीकी प्रगति केसाथ सुदृढ़ सुरक्षा उपाय विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। लोकसभा अध्यक्ष ने ये बातें इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ पर विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहीं। ओम बिरला ने कहाकि एआई में लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने की अपार क्षमता है। उन्होंने उल्लेख कियाकि राष्ट्र का मार्गदर्शक सिद्धांत सदैव सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय रहा है और भारत अपने शाश्वत सभ्यतागत मूल्यों के अंतर्गत वैश्विक कल्याण की भावना केसाथ कार्य करता है।
विधायी कार्यप्रणाली में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि एआई लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहा है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त कीकि डिजिटल संसद जैसी पहलें नागरिकों और संसद केबीच संवाद को सरल बना रही हैं और भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में डिजिटल व सूचना डिवाइड को पाट रही हैं। उन्होंने बतायाकि डिजिटल संसद पहल के अंतर्गत संसदीय कार्यवाही को कागजरहित, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाया गया है। उन्होंने कहाकि एआई उपकरणों की सहायता से हजारों घंटों की संसदीय बहसों और अभिलेखों को व्यवस्थित रूपसे संकलित कर आसानी से खोजने योग्य और सार्वजनिक रूपसे सुलभ बनाया गया है। उन्होंने कहाकि इससे पारदर्शिता बढ़ती है और नागरिक अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यों की निकटता से निगरानी कर सकते हैं, जिससे जवाबदेही सुदृढ़ होती है।
लोकसभा अध्यक्ष ने भारत की भाषाई विविधता का उल्लेख करते हुए संसद भाषिणी पहल का महत्व बताया, जिससे एआई आधारित अनुवाद उपकरणों की सहायता से संसदीय बहसों को अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है। ओम बिरला ने कहाकि अब देशभर के नागरिक अपनी भाषा में संसदीय चर्चाओं को समझ और उनसे जुड़ सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास और सहभागिता मजबूत होती है। उन्होंने कहाकि अंतर्राष्ट्रीय संसदीय मंचों पर विशेषकर पीठासीन अधिकारियों की वैश्विक सहभागिताओं के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को आधुनिक प्रौद्योगिकी से जोड़ने के महत्व पर बल दिया गया है। उन्होंने उल्लेख कियाकि विधायी दक्षता केलिए एआई के उपयोग में भारत के नवाचारों की विश्वस्तर पर सराहना की जा रही है। उन्होंने कहाकि आधुनिक डेटा प्रणालियां सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को बेहतर समझने में सहायता कर रही हैं, जिससे अधिक जनकेंद्रित नीति निर्माण संभव हो रहा है।
ओम बिरला ने कहाकि भारत की एआई रणनीति समावेशी विकास के सिद्धांत पर आधारित है और शिक्षा स्वास्थ्य तथा कृषि जैसे क्षेत्रोंमें एआई का उपयोग विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशामें देश की प्रगति को तीव्र करेगा। उन्होंने कहाकि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाकर, स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी प्रणाली को सुदृढ़कर तथा किसानों को डेटा आधारित समाधान उपलब्ध कराकर एआई लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन ला सकती है, विशेषकर वंचित और असंगठित क्षेत्रों में। उन्होंने कहाकि भारत की डिजिटल अवसंरचना विश्व केलिए एक उदाहरण बन चुकी है, अपने व्यापक स्वरूप समावेशिता और दक्षता के कारण भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का वैश्विक स्तर पर अध्ययन और सराहना की जा रही है। उन्होंने दोहरायाकि भारत सामूहिक प्रगति केलिए अपने डिजिटल अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय केसाथ साझा करने केलिए प्रतिबद्ध है।
एआई के उपयोग की वकालत करते हुए ओम बिरला ने यहभी चेतायाकि प्रौद्योगिकी मानव संवेदनशीलता और नैतिक निर्णय का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने कहाकि एआई एक साधन है साध्य नहीं और इस बात पर बल दियाकि उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास और उपयोग में मानवीय मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नैतिक मानकों को सर्वोपरि रखना आवश्यक है। उन्होंने ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करने का आह्वान किया, जो तकनीकी दक्षता केसाथ-साथ करूणा और सुदृढ़ नैतिक आधार से भी संपन्न हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि एआई फॉर डेमोक्रेसी सत्र में हुए विचार-विमर्श भविष्य के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे, जहां प्रौद्योगिकी और लोकतांत्रिक मूल्य साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यहभी भरोसा जतायाकि नवाचार और सभ्यतागत मूल्यों का समन्वित समागम वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस अवसर पर यूके के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री कनिष्क नारायण, हंगरी की संसद के उपाध्यक्ष लाजोस ओलाह, इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन के महासचिव मार्टिन चुंगोंग ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।

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