'आईएनएस तारागिरी भारतीय नौसेना की दुर्जेय नौसैनिक शक्ति का प्रतीक'
'डिजाइन विकास से लेकर अंतिम तैनाती तक देश की भागीदारी अभिन्न'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 3 April 2026 06:26:05 PM
विशाखापत्तनम। भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी के चौथे शक्तिशाली नवीनतम युद्धपोत ‘आईएनएस तारागिरी’ को आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में नौसैनिक परंपराओं केसाथ भारतीय नौसेना में शामिल किया। रक्षामंत्री ने आईएनएस तारागिरी को केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और दुर्जेय नौसैनिक शक्ति का प्रतीक बताया। राजनाथ सिंह ने कहाकि यह जहाज तेजगति से आवागमन करने में सक्षम है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है, यह दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखने, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाबी कार्रवाई करने केलिए डिज़ाइन किए गए सिस्टम से लैस है। इसमें आधुनिक रडार, सोनार, मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं, जो इसकी परिचालन क्षमता को और बढ़ाती हैं। उन्होंने कहाकि उच्च तीव्रता वाले युद्ध से समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, तटीय निगरानी और मानवीय मिशन तक यह हर भूमिका में पूरी तरह से फिट बैठता है, जो इसे एक अद्वितीय नौसैनिक मंच बनाता है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि 11000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा वाला भारत तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है और वह समुद्र से अलग होकर अपने विकास की कल्पना नहीं कर सकता। उन्होंने कहाकि देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और ऊर्जा सुरक्षा समुद्र पर निर्भर है, इसलिए एक मजबूत और सक्षम नौसेना का निर्माण करना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि परम आवश्यकता है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में समुद्री क्षेत्र के अपार महत्व पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने कहाकि वैश्विक अनिश्चितताओं केबीच भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्रमें चौबीस घंटे अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। उन्होंने कहाकि समुद्र के विशाल विस्तार में कई संवेदनशील बिंदु हैं, जहां हमारी नौसेना माल की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने केलिए लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए रखती है। राजनाथ सिंह ने कहाकि जबभी तनाव बढ़ता है, भारतीय नौसेना वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने केलिए आगे आती है, यह न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करती है, बल्कि वैश्विक स्तरपर हमारे नागरिकों और व्यापार मार्गों की रक्षा के हर आवश्यक उपाय करने केलिए भी तैयार है। यही क्षमता भारत को एक जिम्मेदार और शक्तिशाली समुद्री शक्ति के रूपमें स्थापित करती है।
रक्षामंत्री ने कहाकि डिजिटल युग में दुनिया का अधिकांश डेटा समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों से प्रवाहित होता है और इनमें किसीभी प्रकार की क्षति वैश्विक व्यवस्था को बाधित कर सकती है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा के पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर एक व्यापक भविष्य केलिए तैयार ढांचे के जरिए इसे देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहाकि हमें केवल अपनी तटरेखाओं की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, हमें महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, चोक पॉइंट्स और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए, जो हमारे राष्ट्रीय हितों से अटूट रूपसे जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहाकि भारतीय नौसेना इन सभी सुरक्षा प्रयासों में सक्रिय रूपसे लगी हुई है, यह दृष्टिकोण हमें भविष्य की चुनौतियों केलिए तैयार करता है और जबभी भारत आईएनएस तारागिरी जैसे उन्नत जहाजों का निर्माण और तैनाती करता है तो यह पूरे क्षेत्र केलिए शांति और समृद्धि की गारंटी के रूपमें कार्य करता है। राजनाथ सिंह ने कहाकि जबभी कोई संकट आता है, चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता, भारतीय नौसेना हमेशा सबसे आगे खड़ी रहती है, जो भारत के मूल मूल्यों और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहाकि आईएनएस तारागिरी हमारी नौसेना की ताकत, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी उद्योग के समर्थन से भारतीय नौसेना को आनेवाले समय में विश्व की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में से एक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रक्षा विनिर्माण एक राष्ट्रीय मिशन के रूपमें आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहाकि आज हम केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, हम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपना स्थान सुरक्षित करने केलिए सक्रिय रूपसे प्रयासरत हैं, डिजाइन और विकास से लेकर अंतिम तैनाती तक हर चरण में भारत की भागीदारी अभिन्न है। उन्होंनि कहाकि इससे हमें विश्वास होता हैकि हमारे पास न केवल अपनी सुरक्षा, बल्कि अपने भविष्य को भी आकार देने की क्षमता है, आईएनएस तारागिरी इसी परिकल्पना का प्रतीक है। एक दशक में देश में हुए बदलावों पर राजनाथ सिंह ने कहाकि सरकार ने युवाओं और उद्योग जगत केलिए एक ऐसा वातावरण तैयार किया है, जो नवाचार, उत्पादन और निर्यात को निरंतर बढ़ावा देता है। उन्होंने कहाकि वर्तमान अनिश्चित समय में तैयार रहने केलिए भारत केपास रक्षा क्षेत्रमें आत्मनिर्भरता हासिल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, सुरक्षा प्रयासों को केवल भूमि, समुद्र और वायु तकही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि अंतरिक्ष, साइबरस्पेस और आर्थिक क्षेत्रों तकभी विस्तारित करना चाहिए। उन्होंने बतायाकि इसीसे प्रेरित होकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए हैं, जिनके परिणाम अब स्पष्ट रूपसे दिखाई दे रहे हैं।
रक्षामंत्री ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में लगातार सकारात्मक योगदान देने केलिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और ऐसे कई और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की सराहना की है। उन्होंने इन 16 डीपीएसयू को रक्षा क्षेत्रमें आत्मनिर्भरता का केंद्र बताया। रक्षामंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात को सर्वकालिक उच्चस्तर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचाने में डीपीएसयू और निजी क्षेत्रके प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहाकि आज रक्षा सामान निर्यात लगभग 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, यह इस बात का प्रमाण हैकि भारत की आत्मनिर्भरता लगातार बढ़ रही है, जो यह दर्शाता हैकि हम अपने पैरों पर खड़े हैं। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने आईएनएस तारागिरी की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डाला और 1980 में कमीशन किए गए पूर्व लिएंडर श्रेणी के फ्रिगेट को याद किया, जिसने भारत की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं और परिचालन नवाचार को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। बदलते समुद्री सुरक्षा परिवेश पर विचार करते हुए उन्होंने गतिशील भू-राजनीति, उभरती प्रौद्योगिकियों और गैर पारंपरिक खतरों से प्रभावित हिंद महासागर क्षेत्रकी बढ़ती जटिलताओं को रेखांकित किया। सीएनएस ने राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा केलिए किसीभी समय कहींभी किसीभी तरह से युद्ध केलिए तैयार, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य केलिए तैयार बल बने रहने की नौसेना की प्रतिबद्धता पर बल दिया।
आईएनएस तारागिरी के ऐतिहासिक कमीशनिंग पताका को औपचारिक रूपसे विमोचन किया गया और जहाज पर पहलीबार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला, मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के सीएमडी कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) और नौसैनिक कमीशनिंग समारोह में उपस्थित थे। गौरतलब हैकि आईएनएस तारागिरी अपने पूर्ववर्ती डिज़ाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत छलांग का प्रतिनिधित्व करता है, जो अधिक सुव्यवस्थित रूप और काफी कम रडार क्रॉस सेक्शन प्रदान करता है, इससे यह घातक गुप्तता केसाथ संचालन करने में सक्षम होता है। लगभग 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री केसाथ यह जहाज घरेलू औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है, जिसमें अब 200 से अधिक सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम शामिल हैं, जो सरकार की आत्मनिर्भरता पहल में योगदान दे रहे हैं और हजारों भारतीय रोज़गारों का समर्थन कर रहे हैं। इसके सुव्यवस्थित मॉड्यूलर बाहरी ढांचे के भीतर एक शक्तिशाली तंत्र मौजूद है, जो संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन इंजन द्वारा संचालित है और अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणाली द्वारा प्रबंधित है। यह तकनीकी परिष्कार सुनिश्चित करता हैकि पोत एक बहुमुखी संपत्ति बना रहे, जो किसीभी समय और कहींभी जहाज को सौंपे गए किसीभी मिशन को पूरा करने में सक्षम है।
तारागिरी पोत की युद्धक क्षमता विश्वस्तरीय है, इसमें अतिध्वनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलों और स्वदेशी उन्नत पनडुब्बी रोधी प्रणाली का एक उत्कृष्ट जखीरा शामिल है। हिंद प्रशांत क्षेत्रकी बदलती सुरक्षा स्थिति में, इसका शुभारंभ एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संदेश देता हैकि भारत अब जटिल युद्धपोतों का अग्रणी निर्माता है, जो संभावित शत्रुओं को रोकने और महासागर की परिकल्पना के अंतर्गत सामूहिक क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देने केलिए एक विश्वसनीय स्थिति बनाए रखने में सक्षम है। पूर्वी तट पर पूर्वी बेड़े में शामिल होतेही आईएनएस तारागिरी अपने पूर्ववर्ती की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाता है, उस नाम को सम्मान देता है, जिसने दशकों तक राष्ट्र की सेवा की है। यह भारत की जहाज निर्माण क्षमता और मजबूत सार्वजनिक-निजी सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। आज डेक पर दिया गया संदेश स्पष्ट थाकि-‘भारत के महासागरों की रक्षा भारतीयों के डिजाइन किए गए, भारतीयों के निर्मित और भारतीयों के संचालित जहाजों से की जाती है’।