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दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर आवागमन शुरू

आर्थिक गलियारा ऐतिहासिक विश्वस्तरीय अवसंरचना परियोजना-प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री की देशवासियों को आंबेडकर जयंती व बैसाखी पर शुभकामनाएं!

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 14 April 2026 05:49:16 PM

pm narendra modi inaugurated delhi-dehradun economic corridor

नई दिल्ली/ देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन किया, जो उत्तराखंड और व्यापक क्षेत्र के विकास में एक ऐतिहासिक क्षण है। आज भारतरत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती है, जिसपर प्रधानमंत्री ने देश की ओरसे बाबासाहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने देहरादून से बैसाखी, बोहाग बिहू और पुथंडू पर्व की भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं कि यह उद्घाटन पूरे भारत के उत्सवों के दिन हो रहा है। देवभूमि को नमन करते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख कियाकि यमुनात्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ चारधाम यात्रा भी शुरू होने वाली है, जिसका देशभर में लाखों लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग और इस क्षेत्र के पूजनीय देवी देवताओं, जिनमें माँ संकटला और माँ दात काली शामिल हैं का भी दर्शन पूजन किया। प्रधानमंत्री ने कहाकि माँ दात काली का आशीर्वाद इस विशाल परियोजना को पूरा करने में बहुत बड़ी शक्ति है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के गरीबों और वंचितों केलिए न्याय केप्रति बाबासाहेब के आजीवन समर्पण को रेखांकित करते हुए कहाकि पिछले एक दशक में सरकार की नीतियों ने संवैधानिक मूल्यों को कायम रखने के प्रयास हुए हैं, जिसमें अनुच्छेद 370 का खात्मा और दर्जनों जिलों में माओवाद और नक्सलवाद का उन्मूलन शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहाकि उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता की संवैधानिक आकांक्षा को आगे बढ़ाकर पूरे देश को मार्ग दिखाया है। उत्तराखंड राज्य के छब्बीसवें वर्ष में प्रवेश करने की यात्रा पर प्रधानमंत्री ने अपनी उस पूर्व घोषणा को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा थाकि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। उन्होंने कहाकि सरकार की नीतियों और जनता के परिश्रम से युवा राज्य उत्तराखंड अपने विकास में नए आयाम जोड़ रहा है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के विकास को नई गति प्रदान करने जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि किसीभी राष्ट्र का भविष्य उसकी सड़कों, राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, हवाई मार्गों, रेल मार्गों और जलमार्गों में निहित होता है। उन्होंने बतायाकि जहां 2014 से पहले अवसंरचना पर खर्च प्रति वर्ष 2 लाख करोड़ रुपये से कम था, वहीं अब यह छह गुना से अधिक बढ़कर प्रतिवर्ष 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। नरेंद्र मोदी ने पुष्टि कीकि अकेले उत्तराखंड में ही 22 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं चल रही हैं। दिल्ली-पश्चिमी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने दिल्ली मेट्रो के विस्तार, मेरठ में मेट्रो सेवाओं के शुभारंभ, दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल के उद्घाटन, नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और एमआरओ सुविधा के शुरू होने का जिक्र किया। उन्होंने कहाकि ये सभी कार्य अल्पकाल में ही हुए हैं और पूरे देश में जिस पैमाने पर सुविधाओं का बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है, कल्पना कीजिए कि इस छोटे से क्षेत्रमें जो विकास हो रहा है, वह तो बस उसकी एक झलक है।
दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के परिवर्तनकारी लाभों का वर्णन करते हुए प्रधानमंत्री ने क्षेत्र पर इस परियोजना के बहुआयामी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहाकि एक्सप्रेसवे से यात्रा समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी और माल ढुलाई शुल्क में भी कमी आएगी। उन्होंने कहाकि निर्माण में पहले ही 12000 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है और यह परियोजना रोज़गार का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरी है, जिससे हजारों इंजीनियरों, मजदूरों और परिवहन कर्मचारियों को आजीविका मिल रही है। प्रधानमंत्री ने कहाकि इससे किसानों और पशुपालकों को लाभ होगा, क्योंकि उनकी उपज तेजीसे बड़े बाजारों तक पहुंच सकेगी। उन्होंने कहाकि गाजियाबाद, बागपत, बरौत, शामली और सहारनपुर से गुजरने वाला यह गलियारा उत्तर प्रदेश के इन शहरों को विकसित करने को तैयार है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि यह सिर्फ एक सड़क ही नहीं है, यह पूरे क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, भंडारण और रसद के नए रास्ते खोलती है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की पर्यटन क्षमता पर प्रधानमंत्री बोले। उन्होंने कहाकि देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और चारधाम यात्रा मार्ग अब अधिक सुलभ हो जाएंगे। उन्होंने कहाकि उत्तराखंड शीतकालीन पर्यटन, शीतकालीन खेलों और डेस्टिनेशन वेडिंग केलिए एक प्रमुख गंतव्य बनता जा रहा है। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था केलिए सालभर के पर्यटन के महत्व पर उन्होंने बतायाकि शीतकालीन तीर्थयात्राओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा करने वालों की संख्या कुछ सौ से बढ़कर 2025 में 36000 से अधिक हो गई है, जबकि शीतकालीन चारधाम यात्रा में भागीदारी 2024 में 80000 से बढ़कर 2025 में 1.5 लाख से अधिक हो गई है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि पर्यटन बढ़ने से सभी को लाभ होता है, होटल, ढाबे, टैक्सी, होमस्टे, पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। प्रधानमंत्री ने प्रकृति और संस्कृति केबीच संतुलन बनाए रखने केलिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने एक्सप्रेसवे के हिस्से के रूपमें लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव गलियारे के निर्माण का उल्लेख किया, जिससे हाथियों सहित वन्यजीवन और जानवरों की आवाजाही में किसीभी तरह की बाधा न आए, यह सुनिश्चित किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवभूमि के पहाड़ों और जंगलों में आनेवाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से इन पवित्र स्थलों को साफ-सुथरा और प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखने का आग्रह किया। नरेंद्र मोदी ने कहाकि हमारा प्रयास हैकि बुनियादी ढांचा लोगों की सेवा करे, साथही इन क्षेत्रों के वन्यजीवों और प्राकृतिक धरोहर की भी रक्षा की जाए। अगले वर्ष हरिद्वार में होनेवाले कुंभ को देखते हुए प्रधानमंत्री ने सभी हितधारकों से इस आयोजन को भव्य, पवित्र और स्वच्छ बनाने का आह्वान किया। उन्होंने नंदादेवी राजजात यात्रा का भी जिक्र किया, जो भारत की सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण है, जहां नंदादेवी को पुत्री के रूपमें पूजा जाता है और पूरे सम्मान के साथ विदाई दी जाती है, जिसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी इसे विशेष रूपसे सार्थक बनाती है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि राजजात यात्रा केवल आस्था की यात्रा नहीं है, यह हमारी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण के मूलस्तंभ नारीशक्ति वंदन अधिनियम पर कहाकि सरकार महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और राजनीतिक भागीदारी केलिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने याद दिलाया कि चार दशक के लंबे इंतजार के बाद संसद ने नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं केलिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने घोषणा कीकि इसपर आगे चर्चा केलिए 16 अप्रैल से संसद में एक विशेष बैठक बुलाई गई है। देवभूमि की धरती से सभी राजनीतिक दलों से इसमें संशोधन का समर्थन करने का आग्रह किया, ताकि यह कानून 2029 के आम चुनावों से प्रभावी हो सके। उन्होंने गढ़ी छावनी के ऐतिहासिक स्थल से उत्तराखंड की गौरवशाली सैन्य परंपरा को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने 1962 के युद्ध में शहीद हुए राइफलमैन जसवंत सिंह रावत जैसे वीर योद्धाओं को याद किया। उन्होंने पूर्व सैनिकों केलिए कई कल्याणकारी उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत की। नरेंद्र मोदी ने कहाकि विकसित भारत की परिकल्पना में प्रगति, प्रकृति और संस्कृति को समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने एक्सप्रेसवे के उद्घाटन पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और देश को बधाई दी।

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