भारतीय रेलवे और सड़क इंजीनियरों के एक समूह की राष्ट्रपति से भेंट
'प्रशासक प्रगति के सूत्रधार और आमजन के भरोसे के संरक्षक होते हैं'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 20 April 2026 12:53:20 PM
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों (2022 और 2023 बैच) और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के सहायक कार्यकारी इंजीनियरों (2021, 2022, 2023 और 2024 बैच) ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने अधिकारियों का राष्ट्रपति भवन में गर्मजोशी से स्वागत किया और उनको अपने प्रशासनिक प्रेरक अनुभवों से रू-ब-रू कराते हुए संबोधित किया। राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहाकि वे देश के विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सार्वजनिक सेवा में शामिल हुए हैं, राष्ट्र विकसित भारत निर्माण के सामूहिक संकल्प केसाथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहाकि भारतीय रेलवे और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के अधिकारी होने के नाते वे ऐसी भूमिकाओं में कदम रख रहे हैं, जो लाखों नागरिकों के जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहाकि उनके निर्णय और कार्य नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता पर सीधा और दीर्घकालिक प्रभाव डालेंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि बुनियादी विकास ही आधुनिक राष्ट्रों की नींव है, रेल और राजमार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं हैं, वे आर्थिक विस्तार, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता के उपकरण हैं। उन्होंने कहाकि जब कोई रेल किसी दूरदराज के गांव तक पहुंचती है या कोई राजमार्ग किसी दूरस्थ क्षेत्र से जुड़ता है तो इससे उन क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास के अपार अवसर खुल जाते हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि मजबूत बुनियादी ढांचा लॉजिस्टिक्स लागत को कम करता है, व्यापार को बढ़ावा देता है, निवेश आकर्षित करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। यह क्षेत्रों और लोगों को करीब लाकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलायाकि केवल आंकड़े ही सफलता का पैमाना नहीं होते, उनके काम की असली कसौटी यह हैकि इससे लोगों के जीवन में कितना सुधार होता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अधिकारियों से सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और उत्कृष्टता केप्रति प्रतिबद्धता जैसे लोकसेवा के मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहाकि चुनौतियां और कठिन निर्णय लेने के क्षण अवश्य आएंगे, ऐसे क्षणों में उनके मूल्य ही उनका मार्गदर्शन करेंगे। राष्ट्रपति ने उन्हें हमेशा जिज्ञासु बने रहने, सीखते रहने और नवाचार को बढ़ावा देने की सलाह दी। राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहाकि उनके लिए गए निर्णय, उनके निर्धारित मानक और उनका समर्पण अमिट छाप छोड़ेगा, वे केवल प्रशासक ही नहीं, बल्कि प्रगति के सूत्रधार और आम लोगों के भरोसे के संरक्षक भी हैं।