बीसीएएस और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण समझौता
'देश नागरिक विमानन क्षेत्र में हो रही अभूतपूर्व प्रगति का साक्षी'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 7 April 2026 11:49:23 AM
नई दिल्ली। नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने भारत में विमानन क्षेत्रकी तेजीसे हो रही वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा हैकि हम सभी नागरिक विमानन क्षेत्र में हो रही अभूतपूर्व प्रगति के साक्षी हैं, वर्ष 2014 में जहां देश में 74 हवाई अड्डे थे, वहीं आज इनकी संख्या बढ़कर 165 हो गई है, जो दोगुने से भी अधिक हैं। उन्होंने बतायाकि आज हमारे हवाई अड्डे हर घंटे 250 से 300 विमानों की आवाजाही का प्रबंधन कर रहे हैं और लगभग 40 से 45 हजार यात्रियों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। राममोहन नायडू ने कहाकि केवल यात्री ही नहीं, बल्कि पिछले 10-12 वर्ष में हवाई कार्गो की मात्रा में भी लगभग 50 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने ये बातें ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) केबीच भारतीय हवाई अड्डों पर उपयोग में आनेवाले फुल बॉडी स्कैनर्स (एफबीएस) व दूसरे सुरक्षा स्क्रीनिंग उपकरणों के परीक्षण, प्रदर्शन मूल्यांकन एवं प्रमाणन केलिए समर्पित स्वदेशी परीक्षण केंद्र की स्थापना और संचालन हेतु हुए समझौते के दौरान कहीं।
नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने कहाकि ऐसेमें यह आवश्यक हो जाता हैकि ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के कार्यों में अत्याधुनिक तकनीक और उच्चतम पेशेवर मानकों को अपनाया जाए। उन्होंने कहाकि बीसीएएस और आरआरयू केबीच यह समझौता वास्तव में एक भविष्य उन्मुख और सुदृढ़ विमानन सुरक्षा इकोसिस्टम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता ज्ञापन नई दिल्ली में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु, नागर विमानन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, बीसीएएस के महानिदेशक राजेश निरवान और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बिमल पटेल की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। नागर विमानन मंत्री ने कहाकि यह समझौता एनडीए सरकार के सुरक्षा अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण पर केंद्रित दोहरे दृष्टिकोण का स्वाभाविक विस्तार है। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रित अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण से सुरक्षा को सुदृढ़ करना हमारी प्रमुख प्राथमिकताओं में है, यह पहल मूलतः आत्मनिर्भर भारत व आत्म सुरक्षित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राममोहन नायडू ने कहाकि इस साझेदारी का सबसे बड़ा बिंदु विमानन सुरक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता है। उन्होंने कहाकि विदेशी प्रमाणन प्रक्रियाओं केसाथ तालमेल बिठाते हुए अब हमारा लक्ष्य विमानन सुरक्षा प्रमाणन केलिए एक वैश्विक केंद्र के रूपमें उभरना है और सबसे अहम बात यह हैकि भारतीय ओईएम को टेस्टिंग में मदद देकर हम भारत स्टैंडर्ड्स के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं। राममोहन नायडू ने विश्वास व्यक्त कियाकि बीसीएएस के नियामक अधिकार को आरआरयू की तकनीकी विशेषज्ञता केसाथ जोड़कर हम सुरक्षा उपकरणों के प्रमाणीकरण केलिए एक सशक्त स्वदेशी इकोसिस्टम विकसित करेंगे, जो अमेरिका की टीएसए और यूरोप की ईसीएसी जैसी अंतर्राष्ट्रीय कार्यप्रणालियों के अनुरूप होगा। नागर विमानन मंत्री ने जिक्र कियाकि ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि’ के स्पष्ट उद्देश्य केसाथ राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2010 में की गई थी, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहाकि गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में यह संस्थान अपने क्षेत्रमें विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल है।
नागर विमानन मंत्री ने कहाकि यह साझेदारी बीसीएएस और आरआरयू केबीच विमानन सुरक्षा उपकरणों से जुड़े परीक्षण, प्रमाणन, अनुसंधान, प्रशिक्षण और मानकों के विकास के क्षेत्रोंमें सहयोग का एक सुदृढ़ संस्थागत ढांचा स्थापित करती है। इसका उद्देश्य भारत के विमानन सुरक्षा इकोसिस्टम को और सशक्त बनाना है। समझौते केतहत आरआरयू, बीसीएएस के सहयोग से विशेष परीक्षण केंद्र स्थापित करेगा और उसका रखरखाव करेगा, इसमें बीसीएएस के निर्देशों के अनुसार फुल बॉडी स्कैनर व दूसरे एविएशन सुरक्षा उपकरणों के ट्रायल किए जाएंगे। यह केंद्र ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स के उपकरणों की विशिष्टताओं एवं कार्यक्रम प्रदर्शन का स्वतंत्र मूल्यांकन, सत्यापन व प्रमाणन करेगा और नियामक विचार केलिए निष्पक्ष तथा वैज्ञानिक रूपसे ठोस मूल्यांकन रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। समझौता ज्ञापन में आरआरयू में अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना का प्रावधान है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप होंगी। इन प्रयोगशालाओं में प्रदर्शन, सुरक्षा और पारस्परिकता के कड़े मूल्यांकन किए जाएंगे। इससे एक सुदृढ़ संस्थागत मान्यता ढांचा विकसित करने में मदद मिलेगी, जो यह सुनिश्चित करेगाकि केवल वही उपकरण महत्वपूर्ण विमानन सुरक्षा वातावरण में उपयोग केलिए चयनित हों, जो निर्धारित तकनीकी और परिचालन मानकों पर खरे उतरते हों।
समझौता ज्ञापन में आपसी लाभ केलिए शिक्षा, अनुसंधान, विस्तार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग की भी परिकल्पना की गई है। इसके तहत कार्यशालाओं, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ज्ञान साझाकरण गतिविधियों से क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य परीक्षण, प्रत्यायन और उभरती विमानन सुरक्षा तकनीकों के क्षेत्रमें पेशेवर विशेषज्ञता का विकास करना है। यह साझेदारी विमानन सुरक्षा के क्षेत्रमें अनुसंधान एवं नवाचार को भी प्रोत्साहित करेगी, जिससे बदलते खतरे के परिदृश्यों एवं तकनीकी प्रगति के अनुरूप परीक्षण पद्धतियों, मान्यता मानदंडों और तैनाती प्रोटोकॉल में निरंतर सुधार संभव हो सकेगा। यह भारत के परीक्षण एवं प्रमाणन तंत्र को वैश्विक सर्वोत्तम कार्यक्रम प्रणालियों के अनुरूप बनाने केलिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी और सुगम बनाएगी।